बोफोर्स में राजीव गाँधी और अमिताभ बच्चन को 'क्लीन चिट'

राजीव गांधी
Image caption लिंडस्ट्रोम के अनुसार राजीव गांधी ने बोफोर्स मामले में रिश्वत नही ली लेकिन उन्होंने क्वात्रोकी को बचाने की कोशिश की थी.

लगभग पच्चीस साल बाद बोफोर्स घोटाले का जिन्न एक बार फिर सामने आया है.

ढाई दशकों तक अपनी पहचान छिपाकर रखने वाले स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम ने कहा है कि बोफोर्स घोटाले में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ़ घूस लेने के कोई सबूत नहीं है.

पर उन्होंने ये भी कहा कि इतालवी व्यापारी ओतावियो क्वात्रोकी के खिलाफ़ पुख्ता सबूत थे लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने क्वॉत्रोकी को बचाने की कोशिशों को नज़रअंदाज़ किया.

लिंडस्ट्रोम के अनुसार मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों ने फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन का नाम इस मामले में जबरदस्ती जोड़ा था.

स्टेन लिंडस्ट्रोम ने पहली बार इस बात का खुलासा किया है कि भारत से प्रकाशित होने वाले अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' की पत्रकार चित्रा सुब्रमण्यम को 1987 में उन्होंने ने ही इससे संबंधित दस्तावेज दिए थे.

तब पहली बार चित्रा सुब्रमण्यम ने ही ये पर्दाफाश किया था कि बोफोर्स तोप की खरीदारी में कुछ लोगों को रिश्वत दी गई है, लेकिन उस समय सब ये जानना चाहते थे कि इस ख़बर का सूत्र कौन है.

अब पच्चीस बाद लिंडस्ट्रोम ने इस बात को जगजाहिर कर दिया है कि वे ही उस खबर के सूत्र थे.

लिंडस्ट्रोम ने एक बार फिर चित्रा सुब्रमण्यम को एक इंटरव्यू दिया है जो कि हूट नामक वेबसाइट में छपा है.

लिंडस्ट्रोम के अनुसार इस बात के कोई सबूत नहीं है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बोफोर्स घोटाले में कोई रिश्वत ली थी.

ओतावियो क्वात्रोकी

लेकिन लिंडस्ट्रोम के इंटरव्यू में ये सनसनीखेज बयान है कि राजीव गांधी ने इस घोटाले के एक प्रमुख संदिग्ध ओतावियो क्वात्रोकी को बचाने की कोशिशों की देखकर भी अनदेखी की थी.

लिंडस्ट्रोम के अनुसार इस बात के पुख्ता सबूत थे कि क्वात्रोकी ने रिश्वत ली थी लेकिन भारत सरकार कहती रही थी कि बोफोर्स घोटाले से उनका कोई संबंध नहीं है और स्वीडन तथा स्विट्ज़रलैंड में किसी को भी क्वात्रोकी से पूछताछ करने की इजाजत नहीं थी.

उनके अनुसार बोफोर्स के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक मार्टिन आर्डबो ने अपने नोट में लिखा था कि आर(राजीव गांधी) से निकटता के कारण क्यू (क्वात्रोकी) की पहचान को किसी भी हालत में जाहिर नहीं किया जा सकता.

भारत में इसकी जांच कर रही संस्था सीबीआई ने क्वात्रोकी के खिलाफ़ कोई सबूत नहीं होने के कारण अदालत से उनके खिलाफ़ चल रहे मुकदमें को बंद करने की अपील की थी.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए क्वात्रोकी के खिलाफ़ कार्रवाई को रोक दिया था और उनके बैंक खाते पर लगी पाबंदी भी हटा ली थी.

लिंडस्ट्रोम के अनुसार आर्डबो ने कहा था कि बोफोर्स सौदे में जो पैसे दिए गए थे वे एक तरह का राजनीतिक भुगतान था.

उन्होंने कहा कि इस मामले में अमिताभ बच्चन का नाम जबर्दस्ती घसीटने के लिए उनपर दबाव डाले गए थे.

उनके अनुसार भारत के अधिकारी उनपर भरोसा नहीं करते थे क्योकि उन्होंने अमिताभ बच्चन का नाम इस सौदे से जोड़ने से इनकार कर दिया था.

लिंडस्ट्रोम के अनुसार भारत के किसी भी अधिकारी ने बोफोर्स तोप सौदे की जांच करने वाले स्वीडन के अधिकारी से मुलाकात तक नही की थी.

उनके अनुसार भारत के राजनेता जो पहले उनके सामने ये दावे करते थे कि वे इस मामले की तह तक जाकर रहेंगें, सत्ता में आने के बाद किसी भी राजनेता ने इस मामले में कुछ नही किया.

1986 में भारत ने स्वीडन से लगभग 400 बोफोर्स तोप खरीदने का सौदा किया था जिसकी कीमत लगभग एक अरब तीस करोड़ डॉलर थी.

बाद में 'द हिंदू' अखबार की चित्रा सुब्रमण्यम ने अपनी रिपोर्टों में भंडाफोड़ किया था कि इस सौदे में 64 करोड़ रूपए की रिश्वत दी गई थी.

इस मामले ने भारत में इतना तूल पकड़ा कि 1989 में राजीव गांधी की कांग्रेस पार्टी लोकसभा का चुनाव हार गई थी.

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