ऑपरेशन ग्रीन हंट बंद करने की मांग

  • 25 अप्रैल 2012
Image caption बीडी शर्मा माओवादियों के साथ वार्ता के लिए मध्यस्थ नियुक्त किए गए हैं

छत्तीसगढ़ में माओवादियों द्वारा अगवा किए गए सुकमा जिले के कलेक्टर की रिहाई के लिए नियुक्त मध्यस्थों में से एक और पूर्व आइएएस अधिकारी बीडी शर्मा ने सरकार से अपील की है कि नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान- ऑपरेशन ग्रीन हंट को तत्काल बंद किया जाए.

नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि माओवादियों ने जो प्रेस रिलीज जारी की है उसमें कलेक्टर एलेक्स मेनन के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई गई है.

बीडी शर्मा ने माओवादियों की शर्तों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी माँगों में सुरक्षा बलों को वापस भेजना भी शामिल है.

ये पूछने पर कि क्या अपनी माँगें मनवाने के लिए कलेक्टर का अपहरण करना ठीक है, बीडी शर्मा का कहना था, “जब युद्ध चल रहा हो तो उसमें जायज-नाजायज देखना बड़ा मुश्किल है. अपहरण यदि ठीक नहीं है तो क्या सरकार जो कर रही है, वो ठीक है.”

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उनका कहना था कि पूरे बस्तर में आदिवासियों के पास रहने की जगह तक छीन ली गई है. इसलिए अपनी रक्षा के लिए उसे जो कुछ भी सूझ रहा है, वो कर रहे हैं.

बीडी शर्मा का कहना था कि माओवादियों की माँगें यही हैं कि जो भी फर्जी चीजें हैं वो बंद हों.

ये पूछे जाने पर कि क्या माओवादियों ने अपने साथियों की रिहाई की भी शर्त रखी है, उनका जवाब था, “अभी मुझे इसके बारे में नहीं पता है. ये छत्तीसगढ़ जाने पर ही पता चलेगा. लेकिन माओवादियों ने जो लिस्ट हमें दी है, उसमें ये माँग नहीं की गई है.”

बीडी शर्मा लंबे समय से बस्तर में काम करते रहे हैं और उस इलाके को भली-भांति जानते हैं. उनका मानना है कि कलेक्टर के मामले को सुलझाने की जरूरत है.

इससे पहले बीबीसी को दिए गए एक बयान में माओवादियों ने 25 अप्रैल तक की समयसीमा रखी थी और ऑपरेशन ग्रीनहंट को बंद करने और उनके आठ सहयोगियों को रिहा करने की मांग सरकार के समक्ष रखी थी.

पिछले हफ्ते 21 तारीख को सुकमा के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को मांझीपाड़ा से अगवा कर लिया गया था और उनके दो अंगरक्षकों की हत्या कर दी गई थी.

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