बोफोर्स कांड पर फिर राजनीति गरमाई

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Image caption बोफोर्स रिश्वत कांड रह रह कर भारतीय राजनीति में गूंजता रहता है

बोफोर्स रिश्वत कांड पर एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है.

इस मामले में स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम के ताजा रहस्योद्धाटन से जहां विपक्ष एक फिर सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह मामला अब खत्म हो गया है.

लिंडस्ट्रोम ने कहा है कि बोफोर्स घोटाले में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ घूस लेने के कोई सबूत नहीं है, हालांकि उन्होंने मुख्य अभियुक्त इतालवी व्यापारी ओतावियो क्वात्रोकी को बचाने के मामले में सवाल उठाए हैं.

कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि जो लोग ये आरोप लगाते थे कि राजीव गांधी इस मामले में शामिल हैं, उन्हें अब माफी मांगनी चाहिए.

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि हम इस मुद्दे को फिर से खोल सकते हैं. हम नहीं चाहते कि इसमें कोई नया अध्याय खोला जाए. सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय को फिर से नहीं खोला जा सकता."

उन्होंने कहा कि इस बारे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम है और अब यह मामला खत्म है. खुर्शीद ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वह बिना सबूत राजीव गांधी के खिलाफ आरोप लगाता रहा है.

स्पष्टीकरण की मांग

विपक्षी भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी पार्टियों ने सरकार के रुख को खारिज किया है और लिंडस्ट्रोम के ताजा रहस्योद्घाटन पर स्पष्टीकरण मांगा है. विपक्ष खास तौर से क्वात्रोकी को बचाए जाने के आरोपों पर सरकार को घेर रहा है.

भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, “स्वर्गीय राजीव गांधी की पूरी सरकार ओतावियो क्वात्रोकी को बचाने में जुटी थी. सरकार और गांधी परिवार से उनका ऐसा क्या रिश्ता था कि समूची सरकार उन्हें बचा रही थी. यह गंभीर मामला है.”

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी लिंडस्ट्रोम के बयान पर सरकार से सफाई मांगी है. पार्टी नेता डी राजा ने कहा, “सरकार और सीबीआई इस बयान को अनदेखा नहीं कर सकते हैं. उन्हें बताना होगा कि क्वात्रोकी को किस लिए बचकर जाने दिया गया.”

जब 1987 में बोफोर्स रिश्वत कांड सामने आया तो लिंडस्ट्रोम स्वीडिश पुलिस प्रमख थे. उन्होंने अपनी जांच से जुड़े कई दस्तावेज भारतीय अखबारों को दिए.

यह मामला स्वीडिश हथियार कंपनी एबी बोफोर्स की तरफ से भारतीय सेनाओं को 410 तोपों की ब्रिकी से जुड़ा है जिसमें 64 करोड़ रुपए का रिश्वत देने के आरोप लगे.

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