बोफोर्स मामले को लेकर संसद में हंगामा

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Image caption बोफोर्स तोप सौदों में दलाली को लेकर मुकदमे की फाइल सीबीआई बंद कर चुकी है

बोफोर्स तोप सौदे में दलाली के मामले में पूर्व स्वीडिश पुलिस अधिकारी के रहस्योद्घाटन के बाद गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ.

लोकसभा में भाजपा और वामपंथी पार्टियों के सदस्यों ने बोफोर्स मामले को फिर से खोलने की बात की और इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की.

इस दौरान भाजपा सदस्यों की कांग्रेस के सदस्यों के साथ बहस भी होने लगी.

मामले को बढ़ता देख स्पीकर मीरा कुमार ने लोकसभा को स्थगित कर दिया.

इसी तरह राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर गर्मागर्म बहस हुई. सदन में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने बोफोर्स मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मामले में 25 साल बाद भी सच्चाई का सामने नहीं आना पूरे देश के लिए चिंता की बात है.

भाजपा का कहना था कि सरकार देश को बताए कि अमिताभ बच्चन का नाम इस घोटाले में कैसे आया.

वहीं सीपीआई यानी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया का कहना था कि बोफोर्स मामले की फाइल दोबारा खुलनी चाहिए.

कांग्रेस

लेकिन कांग्रेस पार्टी की ओर से दलील दी गई कि बोफोर्स मामले को सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के बाद बंद किया गया, इसलिए इस पर दोबारा चर्चा की कोई जरूरत नहीं है.

कांग्रेस पार्टी की ओर से संजय निरुपम ने कहा कि राजीव गांधी को बोफोर्स घोटाले का नाम लेकर भाजपा लगातार बदनाम करती रही है लेकिन अब स्टेन लिंडस्टोर्म के बयान से साफ हो गया है कि राजीव गांधी का हाथ इस घोटाले में नहीं था.

उन्होंने कहा कि इस मामले में राजीव गाँधी का नाम बदनाम करने के लिए भाजपा को माफी मांगनी चाहिए.

निरुपम ने यह भी कहा कि बोफोर्स भारत की सबसे शानदार तोप है और इसे घोटाले में घसीटने के लिए भी भाजपा को देश से माफी मांगनी चाहिए.

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