विदेशों में बॉलीवुड के बेताज बादशाह हैं शाहरूख

Image caption प्रवासी भारतीयों के लिए सबसे मशहूर बॉलीवुड स्टार हैं शाहरुख.

विदेशों में प्रवासी भारतीयों के लिए सबसे मशहूर बॉलीवुड स्टार हैं शाहरुख खान. वो विदेशों में बॉलीवुड के बेताज बादशाह हैं.

कोई उनसे शादी करना चाहता है तो कोई उनके बड़े पोस्टर को अपने बेडरूम के दरवाज़े पर लगाए हुए है. कोई उनकी हर फिल्म देख चुका है तो कोई उनसे मिलने की ज़बरदस्त ख्वाहिश रखता है.

अपनी हाल की विदेश यात्रा में मैंने हर जगह उनकी सबसे अधिक चर्चा सुनी. मैं हैरान था की शाहरुख खान की लोकप्रियता इतनी ज्यादा क्यों और कैसे है. उनके फैन क्लब में कम उम्र से लेकर 50 साल की आयु तक के लोग शामिल हैं.

शाहरुख खान की इस लोकप्रियता का दूसरा और शायद स्वाभाविक पहलू ये था कि वे लड़कों से कहीं अधिक लड़कियों में वो मशहूर हैं.

दरवाजे पर पोस्टर

जर्मनी की एक युवती कहती हैं वो शाहरुख खान की बहुत बड़ी भक्त हैं.

थोडा मुस्कुरा कर एक लम्बी सांस ले कर कहती हैं "मगर मेरी माँ उनकी मुझसे भी बड़ी भक्त है. उनके कमरे के दरवाज़े के पीछे शाहरुख खान का एक बड़ा पोस्टर लगा हुआ है."

वह और उसके साथ मौजूद लड़कियां जोर से हंसती हैं और फिर मज़े लेकर कहती है, “मेरी माँ उनकी फ़िल्में बार बार देखती रहती है और वो कहती हैं मैं शाहरुख खान से शादी कर के मन्नत (शाहरुख खान का मुंबई में घर) में उनके साथ रहना चाहती हूँ"

जर्मनी में बॉलीवुड और शाहरुख खान का बयान एक ही सांस में होता है.

सिनेमैक्स सिनेमा घर का एक कर्मचारी कहता है, "अगर आप जर्मनी में बॉलीवुड का नाम लेते हैं तो इसका मतलब शाहरुख खान होता है."

Image caption जर्मनी में लोगों को बॉलीवुड का पता चला शाहरुख खान की फिल्मों से.

इस सिनेमा घर में शाहरुख खान की फ़िल्में अक्सर दिखाई जाती हैं. डान- 2 हाल में दिखाई गयी थी.

जर्मनी में लोगों को बॉलीवुड का पता ही चला शाहरुख खान की फिल्म कभी ख़ुशी कभी गम से.

ये फिल्म एक टीवी चैनल ने 2006 में दिखाई थी. अपनी इस लोकप्रियता का जब शाहरुख खान को पता चला तब से वह बर्लिन फिल्म उत्सव में जाने की पूरी कोशिश करते हैं.

कोलोन में बॉलीवुड पर जर्मन भाषा में एक पत्रिका प्रकाशित होती है जिसकी सम्पादक हैं जूलिया वेस्सेल.

वो नयी पीढ़ी की हैं और खुद शम्मी कपूर की फैन हैं लेकिन शाहरुख खान को जर्मनी में एक फेनोमिनॉ मानती हैं. "शाहरुख खान तीन बार बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में आ चुके हैं. जब वो पहली बार आए तो मीडिया वालों को उन्होंने बहुत अच्छे जवाब दिए जिसके बाद उनकी लोकप्रियता में चार चाँद लग गए"

रो पड़े

नसीम खान भी कोलोन के हैं और बॉलीवुड फिल्मों की एक डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में पार्टनर भी. वह कहते हैं "शाहरुख खान जर्मनी में भारत का सब से बड़ा दूत है."

शाहरुख खान दूसरे देशों में भारत का सबसे अहम प्रतिनिधि है.

मैड्रिड में बॉलीवुड डांस करने वाली लड़कियों का एक क्लब है जिसमें लगभग सभी गोरी लड़कियां हैं और लगभग सभी शाहरुख खान की फैन. पिछले साल पहली बार वह मोरक्को गए मर्राकश फिल्म समारोह में भाग लेने. उनसे ऑटोग्राफ मांगने वाली लड़कियों ने इतना शोर मचाया की खुद शाहरुख खान भी हैरान रह गए.

मर्राकश का एक युवक उस समय वहाँ मौजूद था. वह याद करता है, "लड़के और लडकियां सेक्युरिटी को तोड़ कर उनके करीब जाने के लिए बेताब थे. लोग चिल्ला रहे थे, ऑटोग्राफ, ऑटोग्राफ"

शाहरुख की अदाओं ने फिल्म उत्सव में लोगों का दिल जीत लिया.

वो जानते हैं की श्रोताओं को प्रभावित कैसे करते हैं. सेतात शहर का २५ वर्षीय युनुस उनकी फिल्म ‘कल हो न हो देख’ कर आखिर में रो पड़ा था. जर्मनी में जूलिया वेसेल की माँ भी रो पड़ी थी.

युनुस के दोस्त ने पहले उनका मजाक उड़ाया फिर फिल्म देखी और वह भी रो पड़े. युनुस कहते हैं, "शाहरुख खान सब से सुन्दर पुरुष हैं. उनकी अदाकारी बेमिसाल है. कल हो न हो में जब वो मरते हैं तो कोई भी रो पड़ेगा"

ऋतिक, सलमान पीछे

शाहरुख खान से मिलने की इच्छा रखने वाले मोरक्को के एक युवक ने अपने ब्लॉग में लिखा कि उनकी आखरी ख्वाहिश है शाहरुख खान से मिलना

बेशक मुझे ऐसे भी लोग मिले जो शाहरुख खान के अलावा दूसरे बॉलीवुड स्टार के प्रशंसक हैं. जैसे की मर्राकश का अब्दुल्लाह जिसका ज़िक्र मैं पहले भी कर चूका हूँ. वो ऋतिक और आमिर के फैन हैं. ऋतिक के फैन क्लब की संख्या शाहरुख के बाद सब से अधिक होगी.

मैं कासाब्लांका में जब रुका था तो वो वहां के दो सिनेमा घरों में केवल शाहरुख खान और ऋतिक रौशन की फ़िल्में दिखाई जा रही थीं. सलमान खान तीसरे नंबर पर होंगे.

बॉलीवुड की लड़कियों के भी बहुत दीवाने हैं विदेशों में. काजोल, करीना, माधुरी दीक्षित और प्रीटी जिंटा के नाम काफी लोगों को न केवल पता हैं बल्कि उनकी फ़िल्में भी देखी जाती हैं. जर्मनी में बॉलीवुड डांस की एक्सपर्ट फर्दा बॉस काजोल की फैन हैं. उनकी दोस्त शांति भी. मर्राकश में जिन युवकों से मैंने बातें की उन में से कई माधुरी दीक्षित और प्रीटी जिंटा के फैन निकल आए.

आम तौर से बॉलीवुड की लोकप्रियता प्रवासी भारतीयों के बीच ज्यादा रही है. लेकिन पिछले दस सालों में अब हिंदी फिल्में गोरे, काले, यूरोपियन अफ्रीकन सभी लोगों में हिंदी फ़िल्में पसंद की जाने लगी हैं और शाहरुख के लिए दीवानगी केवल इस रुझान को और आगे बढ़ाने का काम कर रही है.

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