माओवादियों से मिलने जाएंगें वार्ताकार

माओवादी (फाइल फोटो)
Image caption कुछ दिनों पहले ओडिशा के माओवादियों ने एक महीने से अपहृत बीजेडी विधायक को रिहा कर दिया.

नक्सलियों और सरकार के वार्ताकारों के बीच दूसरे दौर की बातचीत खत्म हो गई है.

बैठक के बाद फैसला हुआ है कि वार्ताकार बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल नक्सलियों से मिलने ताड़मेटला जाएंगें.

बैठक के दौरान किन-किन मुद्दों पर बातचीत हुई और क्या नतीजा निकला इसकी आधिकारिक जानकारी तो नहीं मिल पाई है लेकिन इतना ज़रूर तय हुआ है कि नक्सलियों की तरफं से नियुक्त वार्ताकार बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल शुक्रवार को ही हेलिकॉप्टर के ज़रिए नक्सलियों से मिलने के लिए उनके प्रभाव क्षेत्र वाले इलाक़े ताड़मेटला जाएंगें.

इससे पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा था कि अगर नक्सलियों की तरफ से नियुक्त किए गए वार्ताकार ताड़मेटला और चिंतलनार इलाके में जाकर नक्सलियों से चर्चा करना चाहते हैं तो सरकार उनकी पूरी मदद करेगी.

रमन सिंह ने ये भी कहा था कि सरकार नक्सलियों के साथ शांति वार्ता के लिए भी तैयार है.

गौरतलब है कि माओवादियों ने सुकमा के कलेक्टर को 24 अप्रैल को अगवा कर लिया था. उनकी रिहाई के लिए राज्य सरकार बातचीत कर रही है.इसके लिए औपचारिक तौर पर एक कमेटी का भी गठन किया गया है.

माओवादियों की तरफ से बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल हैं जबकि सरकार की ओर से निर्मला बुच और सुयोग्य मिश्रा हैं.

छह लोग रिहा

इस बीच माओवादियों ने सुकमा से ही अगवा किए गए एक सहायक आरक्षक और पांच अन्य ग्रामीणों को रिहा कर दिया है.

माओवादियों ने इन सभी को सुकमा जिले के अरगट्टा इलाके से 16 अप्रैल को अगवा किया था.

इनमें सहायक आरक्षक सत्यम देवा और चार अन्य ग्रामीणों को माओवादी छापामार अपने साथ ले गए थे. सत्यम देवा पहले विशेष पुलिस अधिकारी थे जिन्हें बाद में सहायक आरक्षक के रूप में बहाल कर लिया गया था.

कहा जा रहा है कि देवा सुकमा मुख्यालय से अपने गांव अरगट्टा गए हुए थे जब उनका अपहरण किया गया था. इसके अलावा उसी गाँव के मुखिया और अरगट्टा के पास के ही एक गाँव के भी मुखिया को माओवादी अपने साथ ले गए थे.

दस दिनों के बाद शुक्रवार की सुबह इन्हें माओवादियों नें किसी अज्ञात स्थान पर रिहा कर दिया. पुलिस का कहना है कि देवा को नौकरी छोड़ने की शर्त पर रिहा किया गया है. पुलिस रिहा किए गए सहायक आरक्षक और ग्रामीणों से अभी तक पूछ ताछ नहीं कर सकी है.

सुकमा के दोरनापाल के अनुमंडल पुलिस अधिकारी जय प्रकाश का कहना है कि रिहा किए गए लोग अपने गाँव वापस लौट गए हैं.

उनका कहना है कि नक्सलियों नें ग्रामीणों को थाने नहीं जाने के निर्देश के साथ रिहा किया है.

हालाकि पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि माओवादियों नें इन ग्रामीणों को सुकमा के किस इलाके में दस दिनों तक रखा था ताकि इस बात का अंदाजा मिल सके कि अगवा किए गए सुकमा के कलेक्टर कहाँ रखे जा सकते हैं.

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