माओवादी समय-सीमा बढाने को तैयार

Image caption माओवादियों ने कलेक्टर को रिहा करने के बदले अपने साथियों की जेल से रिहाई के लिए 25 अप्रैल की समय सीमा तय की थी

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) नें कहा है कि अगर छत्तीसगढ़ की सरकार उनकी मांगों के प्रति अपना रवैया स्पष्ट करे तो वह अगवा किए गए सुकमा के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन की रिहाई के लिए तय समय-सीमा बढाने पर विचार कर सकते हैं.

बीबीसी को शुक्रवार की सुबह जारी की गई एक विज्ञप्ति में दक्षिण बस्तर डिविज़नल कमेटी के सचिव विजय मडकाम के हवाले से कहा गया है कि छत्तीसगढ़ की सरकार की ओर से 'समय सीमा बढाने के अनुरोध' के बारे में उन्हें मीडिया से जानकारी मिली है.

विज्ञप्ति में कहा गया है, "इस बारे में हम ऐन वक़्त पर निर्णय लेने में असमर्थ है क्योंकि हमारी मांगों पर शासन की ओर से आज तक कोई जवाब नहीं मिलने की स्थिति में हम समय सीमा बढाने के बारे में निर्णय कैसे लेंगे."

माओवादियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की सरकार द्वारा उनकी मांगों पर अपना रवैया स्पष्ट करने के बाद वह (माओवादी) अपने मध्यस्थों के जरिए समय-सीमा बढाने पर जवाब भेज सकते हैं.

इससे पहले, माओवादियों ने कलेक्टर को रिहा करने के बदले अपने आठ साथियों और नौ ग्रामीणों को जेल से रिहा करने के लिए 25 अप्रैल की समय सीमा तय की थी.

समय-सीमा तो गुज़र गई मगर माओवादियों की तरफ से नई समय-सीमा तय नहीं की गयी है.

जन अदालत में पेशी

माओवादियों नें यह भी कहा था कि समय-सीमा के ख़त्म होने के बाद वह अगवा किये गए कलेक्टर को जन अदालत में पेश करेंगे. मगर यह पता नहीं चल पाया है कि माओवादियों नें जन अदालत लगाई है या नहीं.

शुक्रवार को सीपीआई के नेता और पूर्व विधायक मनीष कुंजाम माओवादियों के कब्जे में मौजूद कलेक्टर के लिए दवाएं पहुंचाकर वापस लौटे तो उन्होंने बताया कि अभी तक माओवादियों द्वारा 'जन-अदालत' लगाए जाने की कोई पुष्टि नहीं हो पायी है.

माओवादियों की तरफ से शनिवार को दो विज्ञप्तियां जारी की गयीं हैं. दूसरी विज्ञप्ति संगठन की दंण्डकारण्य दक्षिण रीजनल कमेटी की तरफ से जारी की गयी है जिसमें माओवादियों ने अलेक्स पॉल मेनन को अगवा करने की सफाई दी है.

इनमें कहा गया है कि सुकमा के इलाके में पुलिस के ज़ुल्म की कई वारदातें हुईं हैं, मगर कलेक्टर ने उनका संज्ञान नहीं लिया था.

अमानवीय यातनाओं का आरोप

संगठन ने सुकमा के पोडियम मड्डा नामक युवक का ज़िक्र करते हुए आरोप लगाया है कि उसे सुकमा थाने में अमानवीय यातनाएं देकर उसके गुप्तांगों में पेट्रोल डाला गया जिससे उसी मौत हो गयी.

माओवादियों का आरोप है कि पोडियम के मरने के बाद पुलिस ने दिखाने की कोशिश की कि उसने हाजत में आत्महत्या कर ली.

संगठन का कहना है कि ग्रामीणों के प्रतिवेदन के बावजूद कलेक्टर ने इस मामले में कुछ नहीं किया.

विज्ञप्ति में कहा गया है, "बस्तर संभाग में सैकड़ों पुलिस एवं अर्द्ध सैनिक बलों को तैनात कर ग्रामीणों का जीवन अर्धसैनिक बलों के जूतों के नीचे रौंदा जा रहा है. विशेषकर सुकमा जिले में आदिवासियों का जीवन शासन की बर्बरता से नरक बन गया है. ग्रामीण आदिवासी हाट बाज़ार, शादी-ब्याह, त्योहारों में स्वेच्छा से भाग नहीं ले रहे हैं.

इसमें कहा गया है, ''कब किस गाँव में पुलिस का हमला होगा, किनकी मुठभेड़ के नाम से हत्या होगी, किस महिला को पकड़ कर यातना देंगे, पता नहीं. ऐसे पुलिस के दमन एवं आतंक से जनता अपनी जान हथेली पर रखकर जी रही है. इन सारे अमानवीय एवं ग़ैर लोकतांत्रिक क़दमों को कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन क्यों नहीं रोक पाए?"

इसके अलावा विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ की जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों की स्थिति का उल्लेख किया गया है.

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