अब शिक्षकों को सीपीएम से नाता तोड़ने का फरमान

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Image caption ममता बनर्जी और उनकी पार्टी नित नए फरमानों से सुर्खियों में रहती हैं

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की छात्र शाखा ने कहा है कि कॉलेजों में पढ़ाने वाले प्रोफेसर, रीडर और लेक्चरर विपक्षी सीपीएम पार्टी या उससे जुड़ी किसी यूनियन से कोई नाता नहीं रख सकते.

हाल के दिनों में अपने अजीबोगरीब फरमानों के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और मंत्रियों ने काफी सुर्खियां बटोरी हैं. ताजा फरमान इसी की अगली कड़ी है.

तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद के बंगाल प्रदेश अध्यक्ष शंकु पांडा ने यह फरमान जारी किया है.

कोलकाता के बांगुर कॉलेज में मारपीट की घटना के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के छात्र संगठन की ओर से आयोजित एक रैली में पांडा ने कहा, "अध्यापक का चोला ओढ़ कर कोई सीपीएम से संबंध रखेगा, अब ऐसा नहीं चलेगा. किसी ने ऐसा किया तो हम उससे निपट लेंगे."

उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीएम के शासनकाल के दौरान ज्यादातार लोगों ने अपने बाप-दादाओं को पकड़ कर सिफारिश के आधार पर कॉलेज की नौकरी हासिल की है. ऐसे लोगों के पास कॉलेजों में पढ़ाने लायक योग्यता ही नहीं है.

नीति

राज्य सरकार यह कह कर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है कि ऐसी कोई सरकारी नीति नहीं है कि कॉलेज में पढ़ाने वाला सीपीएम से संबंध नहीं रख सकता. शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु कहते हैं, “उनको शंकु की टिप्पणी के बारे में कोई जानकारी नहीं है. मैं इस बारे में पता करूंगा.”

लेकिन शंकु पांडा अपने बयान पर कायम हैं. वह कहते हैं, "कॉलेज में पढ़ाने वाले सीपीएम से संबंध नहीं रख सकते. राज्य में शिक्षा व्यवस्था ढह गई है. शिक्षक अपनी पुरानी आदत के मुताबिक समय पर क्लास में नहीं पहुंचते. ऐसा नहीं चल सकता. शिक्षण संस्थानों को राजनीति से मुक्त रखना होगा."

शंकु की बातों का तृणमूल कांग्रेस खुल कर समर्थन भले नहीं कर रही हो, लेकिन बांगुर कॉलेज में एक शिक्षिका के साथ मारपीट के मामले में पार्टी ने अपने पूर्व विधायक और उस कॉलेज की संचालन समिति के अध्यक्ष अराबुल इस्लाम को क्लीन चिट दे दी है.

तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी कहते हैं कि अराबुल को संयम बरतने को कहा गया है. इससे स्पष्ट है कि सरकार उनके खिलाफ किसी कार्रवाई के मूड में नहीं है.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता साफ कहते हैं, "यह राजनीतिक मामला है. जिस शिक्षिका के साथ धक्कामुक्की की गई है, वह सीपीएम की सदस्य हैं." उस नेता का सवाल था कि कॉलेज को सीपीएम के हाथों में कैसे छोड़ा जा सकता है?

दूसरी ओर, सीपीएम ने तृणमूल कांग्रेस पर शिक्षण संस्थानों में भी नफरत की आग फैलाने का आरोप लगाया है. सीपीएम के दक्षिण 24-परगना जिला सचिव सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, “मां, माटी और मानुष की यह सरकार समाज सुधार के वायदे के साथ सत्ता में आई थी. लेकिन इसके अनैतिक रवैए का विरोध करने वालों को षड़यंत्रकारी या सीपीएम का आदमी बता कर उसका मुंह बंद करने की कोशिश हो रही है.”

फरमानों की फहरिस्त

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Image caption ये फरमान ममता के विरोधियों के बैठे बिठाए मुद्दे थमा रहे हैं

वैसे, तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी होने वाले फरमानों का यह पहला मामला नहीं है. पार्टी के नेता और मंत्री ज्योतिप्रयि मल्लिक ने तो एक रैली में अपने कार्यकर्ताओं से साफ कहा था कि वे सीपीएम के नेताओं के घर न तो शादी-ब्याह करें और न ही उनसे कोई संबंध रखें. उन्होंने सीपीएम करने वाले रिश्तेदारों से भी दूरी बरतने की सलाह दी थी.

मल्लिक का कहना था कि अगर किसी चाय दुकान पर सीपीएम के लोग बैठते हों तो तृणमूल कार्यकर्ताओं को वहां नहीं बैठना चाहिए.

इस मामले पर विवाद अभी थमा भी नहीं था कि खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक सरकारी कार्यक्रम में लोगों को सलाह दी कि वे समाचार चैनल देखने के बजाय मनोरंजन चैनल देखें या गाने सुनें.

उन्होंने तमाम चैनलों के नाम गिनाते हुए कहा कि किसे देखें और किसे नहीं. इसके दो दिनों बाद ही उन्होंने कहा कि सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाने के लिए अपना अखबार और टीवी चैनल शुरू करेगी.

वैसे, ममता लंबे अरसे से मीडिया के एक गुट पर सरकार की नकारात्मक छवि पेश करने का आरोप लगाती रही हैं. अब छात्र संगठन के अध्यक्ष के इस ताजा फरमान पर भी विवाद बढ़ना स्वाभाविक है. वैसे, इस मामले पर अब तक ममता की ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई है. इससे समझा जाता है कि इसे उनका मौन समर्थन हासिल है.

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