वाघा तक पहुँच सकते हैं तालिबान: वायुसेना प्रमुख

  • 29 अप्रैल 2012
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Image caption वायुसेना प्रमुख ने भारत के दोनों पड़ोसियों पाकिस्तान और चीन को लेकर चिंता जताई है

भारतीय वायुसेना के प्रमुख एनएके ब्राउन ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान के इलाके में अस्थिरता की वजह से भारत की सुरक्षा को खतरा हो सकता है.

उनका कहना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है तो अगले दो वर्षों में अफगानिस्तान से अंतरराष्ट्रीय फौजों और अमरीकी सेना की वापसी के बाद तालिबान पाकिस्तान से लगी भारतीय सीमा में वाघा के करीब तक पहुँच सकते हैं.

उन्होंने कहा, "अफगानिस्तान और पाकिस्तान की अस्थिरता की पृष्ठभूमि में वर्ष 2013 और 2014 भारतीय सुरक्षा के लिए अहम साबित हो सकते हैं."

ब्राउन ने पाकिस्तान और चीन की ओर से सीमा विवाद को हल न किए जाने को लेकर भी चिंता जाहिर की है.

चेतावनी

बंगलौर में एयर चीफ़ मार्शल एलएम खत्रे स्मृति व्याख्यानमाला में बोलते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय फौजों और अमरीकी सेना की वापसी के बाद यदि अफगानिस्तान की स्थिति बिगड़ती है तो डर है कि धार्मिक कट्टरपंथी गुट वाघा सीमा के बहुत नजदीक तक पहुँच सकते हैं."

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "इससे पहले अफगानिस्तान आतंकवाद का केंद्र हुआ करता था लेकिन स्थिति में बहुत तेजी से नाटकीय परिवर्तन हुआ है. यह खतरा न केवल उत्तर पश्चिमी प्रांत में बल्कि पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में भी बढ़ा है, जहां पंजाबी तालिबान तेजी से उभर रहे हैं."

'पाकिस्तान के योजनाबद्ध ढंग से हो रहे तालिबानीकरण' पर चिंता जताते हुए उन्होंने जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद के उस बयान की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिसमें उन्होंने कहा है कि 'अभी हम काबुल से जूझ रहे हैं एक बार वो हल हो जाए तो फिर कश्मीर की बारी है'.

हाफिज सईद लश्करे तैबा के पूर्व प्रमुख हैं और भारत उन्हें मुंबई में 26/11 को हुए चरमपंथी हमलों का मास्टरमाइंड मानता है.

उन्होंने अफगानिस्तान में अस्थिरता की चिंता करते हुए कहा कि वर्तमान सुरक्षा ढांचा शांति सुनिश्चित करने तथा तालिबान और अल कायदा को मजबूत बनने से रोकने में सक्षम नहीं है.

चीन-पाकिस्तान के गठजोड़ पर चिंता

पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद का हल न होने को चिंता का प्रमुख विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि शायद इसका हल जानबूझ कर नहीं निकाला जा रहा है.

एयर चीफ़ मार्शल एनएके ब्राउन ने कहा, "चीन चाहता है कि सीमा विवाद उसकी समझ के अनुसार हल हो न कि हमारे."

भारत के दो अहम पड़ोसियों (पाकिस्तान और चीन) को लेकर भारत की स्थिति का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा परमाणु, मिसाइल, विमानन और हथियारों की तकनीक और विकास के मामले में मिलकर काम कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता कि दुनिया के किसी और हिस्से में कोई देश इस तरह की परिस्थितियों का सामना कर रहा है."

इन परिस्थितियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वायुसेना अपनी क्षमताओं के विस्तार में जुटी हुई है.

उन्होंने कहा कि नक्सली समस्या से निपटने के लिए भी वायुसेना ने अपने सहयोग में बढ़ोत्तरी की है और पहले जहाँ दो हेलिकॉप्टर तैनात थे अब वहाँ छह हेलिकॉप्टर तैनात कर दिए गए हैं.

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