आसान नहीं है पायलट बनना

नीलेश दातिर
Image caption नीलेश दातिर ने अमरीका से प्रशिक्षण लिया था

विभिन्न पेशों से जुड़े पेचीदे सवालों का जवाब आप तक पहुंचाने के लिए हर शनिवार बीबीसी हिंदी सेवा आपकी मुलाकात ऐसे पेशेवर व्यक्तियों से करवाएगी, जिनका काम अपने ही आप में अनूठा हो.

इस कड़ी में पायलट नीलेश दातिर से बात की बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने.

सबसे पहले तो हमें यह बताइए कि पायलट बनने के लिए किस तरह कि ट्रेनिंग की जरूरत पड़ी आपको?

पहले तो आपको बारहवीं पास होना जरूरी है. इसके अलावा गणित और भौतिक शास्त्र, यह दो विषय होना जरूरी है. उसके बाद एक ट्रेनिंग होती है कमर्शियल पायलट लाइसेंस ट्रेनिंग. इस ट्रेनिंग के लिए आपको 200 घंटे की फ़्लाइंग करनी पड़ती है. भारत में इस ट्रेनिंग को पूरा करने के लिए थोड़ा समय लगता है, लेकिन अगर आप विदेश जाते हो, जैसे न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अमरीका या कनाडा, तो वहां आपकी फ़्लाइंग जल्दी पूरी हो जाती है करीब आठ महीनों में.

भारत में कितना समय लगता है?

यहाँ पर करीब डेढ़ से दो साल लग जाते हैं.

इतना समय लग जाता है?

फ़्लाइंग स्कूलों के पास हवाई जहाज़ नहीं हैं और अगर जहाज हैं तो प्रशिक्षक नहीं हैं.

अगर इस नौकरी में किसी को रूचि है, तो उसे कितने पैसे खर्च करने होंगे?

मैंने जब फ़्लाइंग की थी करीब चार साल पहले, तो मुझे 18 लाख रुपए खर्च करने पड़े थे लेकिन मुझे लगता है अब लगभग 20 से 22 लाख रुपए खर्च होते हैं.

20 से 22 लाख के करीब?

जी हाँ.

तो काफी महंगा है.

जी हाँ, 200 घंटे के बाद भी आप कोई विमान कंपनी में भर्ती होते हैं, और जो भी जहाज़ आप उड़ा रहे हों, उस जहाज़ का भी विशेष प्रशिक्षण होता है और उस प्रशिक्षण के लिए कई विमान कंपनी खुद ही खर्च करती है अन्यथा आपको 15 लाख रुपए अपनी तरफ से देने पड़ते हैं. या तो विमान कंपनी खर्च उठाती है या फिर आप.

मतलब उत्कृष्ट विशेषता प्राप्त करनी पड़ती है और उसके लिए अलग से 15 लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं. तो सबसे अच्छा फ़्लाइंग स्कूल कौन सा है भारत में?

भारत में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी है.

वो कहाँ पर है?

अगर मैं गलत नही हूँ तो देहरादून में, पूरे यकीन से नहीं कह सकता.

आपने कहाँ से किया था?

मैंने किया था अमरीका से, कैलिफोर्निया में था मैं.

कैलिफोर्निया से किया था, तो आपने आठ महीने में खत्म कर लिया था.

हाँ आठ महीनों में हो गया था.

पायलट बनाने का सपना था आपका?

मेरे पिताजी विमान कंपनी में ही काम करते थे. वो एक ग्राउंड स्टाफ थे. जब मैं छोटा था तब विमान कंपनी के कैलेंडर्स आते थे. उसमें सारे जहाजों के फोटो होते थे, विदेशों में जहाँ जहाज़ जाता था वहां के फोटो होते थे. पायलट, एयर होस्टेस, केबिन क्रू के फोटो होते थे. जबसे छोटा था, तबसे मैं ये सब देखते आ रहा था तो मन में था कि मैं भी किसी दिन पायलट बनूँगा.

तो यह प्रेरणा वहां से मिली आपको.

जी

ऐसे तो बहुत ही ग्लैमरस जॉब दिखता है पायलट बनना या केबिन क्रू का हिस्सा होना. एयर होस्टेस बनने के लिए लड़कियां बेताब होती हैं, तो क्या इतना ही ग्लैमरस है अंदर से भी, जितना बाहर से दिखता है?

ग्लैमरस तो जरूर है लेकिन इस काम में बहुत ज्यादा मेहनत भी होती है. पायलट बनने के पहले मैं केबिन क्रू रह चुका हूँ. मैंने चार साल केबिन क्रू का काम किया है. केबिन क्रू का काम बहुत कठिन होता है बहुत मेहनत का काम होता है जितना आसान लगता है उतना है नहीं. आप जब दूसरे देश में जाते हो तो यहाँ का समय अलग होता है वहां का समय अलग होता है तो आपके शरीर को उस हिसाब से अनुकूल होना पड़ता है.

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