सेना और सरकार में अनबन नहीं होनी चाहिए थी: प्रतिभा पाटिल

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Image caption राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल इसी वर्ष 24 जुलाई को खत्म हो रहा है.

भारतीय सुरक्षा बलों की सर्वोच्च सेनापति, राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का मानना है कि सेनाध्यक्ष जेनरल वी के सिंह और सरकार के बीच हुई अनबन से अनुशासित ढंग से निपटना चाहिए था.

अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “मेरे ख्याल से ये नहीं होना चाहिए था, इससे अनुशासित ढंग से निपटना चाहिए था.”

हालांकि राष्ट्रपति ने इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार या सुरक्षा अधिकारियों से हुई किसी चर्चा की जानकारी नहीं दी.

सेनाध्यक्ष जेनरल वी के सिंह की जन्मतिथि पर सरकार से मतभेद होने पर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

लेकिन कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया जिसके बाद सेनाध्यक्ष ने अपनी अर्जी वापस ले ली.

यह पहला मौका था जब देश के किसी सेनाध्यक्ष ने सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की.

अगला राष्ट्रपति?

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल इसी वर्ष 24 जुलाई को खत्म हो रहा है.

अपने साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि अगले राष्ट्रपति में “मुश्किल परिस्थितियों” से निपटने के लिए “मानसिक दृढ़ता और सूझबूझ” होनी चाहिए.

राष्ट्रपति पद के लिए “गैर-राजनीतिक” उम्मीदवार होने की मांग पर तो उन्होंने कुछ नहीं कहा लेकिन इस ओर ध्यान दिलाया कि इस पद के लिए उनके चुनाव की वजह राजनीति में उनका लंबा अनुभव ही था.

27 वर्ष की उम्र में प्रतिभा पाटिल को महाराष्ट्र में विधायक के तौर पर चुना गया था.

उनके विदेश दौरों पर ज्यादा खर्च के कथित आरोपों पर उन्होंने कहा, कि लोग ये नहीं समझते कि ये “विदेश नीति” का हिस्सा होते हैं और इनका फैसला राष्ट्रपति नहीं बल्कि सरकार लेती है.

शनिवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल अपने आखिरी विदेश दौरे पर सेशेल्स और दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर निकली हैं.

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