छत्तीसगढ़ में अगवा कलेक्टर मेनन रिहा

  • 3 मई 2012
एलेक्स पॉल मेनन
Image caption एलेक्स पॉल मेनन को माओवादियों ने 21 अप्रैल को अगवा किया था

छत्तीसगढ़ में माओवादियों की ओर से अगवा किए गए सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को रिहा कर दिया गया है.

अब से कुछ देर पहले माओवादियों की ओर से नियुक्त दोनों वार्ताकार बीडी शर्मा और प्रोफ़ेसर हरगोपाल ताड़मेटला से अंदर जंगल से उन्हें लेकर लौटे.

दोनों वार्ताकार कलेक्टर मेनन को लेकर ताड़मेटला के पास स्थित सीआरपीएफ़ कैंप चिंतलनार में पहुँचे.

कलेक्टर मेनन ने वहाँ मौजूद पत्रकारों से बातचीत में छत्तीसगढ़ सरकार का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि वे काफी थके हुए हैं और एक दिन बाद पत्रकारों से बात करेंगे.

मेनन ने कहा, "मैं मध्यस्थों, राज्य सरकार और सभी वरिष्ठ अधिकारियों को धन्यवाद देता हूँ."

समझौता

दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि समझौते में जो बात लिखी गई है उसे पूरा किया जाएगा.

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, "वार्ता बिल्कुल साफ है. जो बातें दस्तावेज में है उससे अतिरिक्त कोई भी चर्चा नहीं हुई है. समझौते में जो लिखा है हम उसका क्रियान्वयन करेंगे, न उससे एक बात ज्यादा न उससे एक बात कम."

साथ ही मुख्य मंत्री ने कहा कि वो कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन के संपर्क में है और मामाले पर एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है.

गत 21 अप्रैल को एलेक्स पॉल मेनन का अपहरण किया गया था और उसके बाद माओवादियों ने बीबीसी को भेजे एक संदेश में उनकी रिहाई के बदले कई मांगें रखी थीं.

नक्सलियों ने पहले भी किए हैं अपहरण

बाद में सरकार की ओर से और माओवादियों की ओर से दो-दो मध्यस्थों की नियुक्ति की गई थी.

मध्यस्थों के बीच हुई लंबी चर्चाओं के बाद एक समझौता हुआ था और माओवादियों ने कलेक्टर की रिहाई के लिए हामी भरी थी.

संदेश

बीबीसी को भेजे एक और संदेश में माओवादियों ने कहा था कि वे तीन मई को ताड़मेटला में कलेक्टर मेनन को रिहा कर देंगे.

ताड़मेटला वही जगह है जहाँ पर माओवादियों ने अपने वार्ताकारों को बुलाया था और उनके साथ जंगल में लंबी चर्चा की थी.

माओवादियों ने बताया कि जेल में बंद उनके साथियों की रिहाई को लेकर उनके वार्ताकारों का सरकार से समझौता हुआ है.

बाद में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने माओवादियों से हुए समझौते को 'ऐतिहासिक' बताया था और कहा था कि ये एक उदाहरण है कि ऐसी परिस्थितियों में किस तरह का समझौता होना चाहिए

लेकिन वार्ताकारों के समझौते के बाद से ऐसे कई सवाल उठ खड़े हुए हैं जिनके जवाब इस समझौते में भी नहीं मिलते.

माओवादी पहले मांग कर रहे थे कि अबूझमाढ़ इलाके से सुरक्षा बलों को हटा लिया जाए लेकिन यह बात इसमें शामिल नहीं है.

माओवादी अपने खिलाफ सुरक्षा बलों के जिस ग्रीनहंट ऑपरेशन को बंद करने की मांग करते रहे हैं उसका भी इस समझौते में कोई जिक्र नहीं है.

समझौते के मुताबिक सरकार ने कुछ माओवादियों को रिहा करने पर कोई सहमति नहीं जताई है और सिर्फ़ ये कहा है कि कुछ मामलों पर पुनर्विचार के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा. जबकि माओवादी अपने कई नेताओं की रिहाई की मांग कर रहे थे जिसके बदले में वे कलेक्टर मेनन को रिहा करेंगे.

ऐसे में कलेक्टर की रिहाई के लिए सरकार और माओवादियों के बीच कुछ समझौते को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.

माफ़ी मांगी

Image caption माओवादियों ने कहा है कि वे जनता के सामने कलेक्टर को रिहा करेंगे

बीडी शर्मा और प्रोफ़ेसर हरगोपाल के जंगल के भीतर जाने से पहले माओवादियों ने मुझे आवाज़ देकर भीतर बुलवाया और वहाँ माओवादियों के कमांडर महेश ने पत्रकारों के साथ हुए दुर्व्यवहार के लिए माओवादियों की ओर से माफ़ी मांगी.

बीबीसी हिंदी ने अपने सुबह के कार्यक्रम नमस्कार भारत में ये ख़बर प्रसारित की थी कि ताड़मेटला में कुछ माओवादियों ने पत्रकारों को वहाँ से चले जाने को कहा और धमकी दी कि अगर वे नहीं गए तो उन्हें गोली मार दी जाएगी.

इस ख़बर में बताया गया था कि इससे पहले जिस दिन बीडी शर्मा और प्रोफ़ेसर हरगोपाल पहली बार माओवादियों से चर्चा करने के लिए जा रहे थे, उस दिन भी माओवादियों ने पत्रकारों की तलाशी ली थी.

टेलीविज़न चैनलों के पत्रकारों ने बीबीसी को बताया था कि उनके ओबी वैन के ड्राइवरों को भी धमकाया गया था.

इसकी वजह से पत्रकारों के भीतर एक तरह का डर था और वे सवाल पूछ रहे थे कि अगर ताड़मेटला में माओवादी कलेक्टर को रिहा करेंगे तो इसके कवरेज के लिए ताड़मेटला जाना होगा लेकिन ऐसी धमकियों के बीच वहाँ कैसे जा सकेंगे.

इन ख़बरों के प्रसारित होने के बाद माओवादियों ने बीबीसी के ज़रिए पत्रकारों से माफ़ी मांगी.

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