'पुलिस प्रताड़ित' सोरी को दिल्ली भेजा जाएः सुप्रीम कोर्ट

  • 3 मई 2012
सोनी सोरी
Image caption सोनी सोरी के लिए एकजुट

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया है कि माओवादियों से सहानुभूति रखने के आरोप में जेल में बंद आदिवासी अध्यापिका सोनी सोरी को इलाज के लिए एक हफ्ते के भीतर नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भेजा जाए.

जस्टिस अल्तमस कबीर और जस्टिस जे चेलामेश्वर की खंडपीठ ने एम्स के निदेशक को निर्देश दिया कि वो सोरी को इलाज से जुडी हर तरह की मदद दें और 10 जुलाई से पहले अपनी रिपोर्ट सौंपें.

डॉक्टरों की इस खास टीम में महिला रोग विभाग प्रमुख, एक हृदय रोग विशेषज्ञ और हार्मोन संबंधी बीमारियों के एक विशेषज्ञ को रखा जाएगा ताकि सोरी का इलाज करने के साथ साथ उनकी ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच हो सके.

सोरी को पिछले साल दिल्ली में छत्तीसगढ़ पुलिस की एक टीम ने गिरफ्तार किया था.

संगीन आरोप

संदिग्ध माओवादी सोरी पर एस्सार समूह से 'सुरक्षा के बदले पैसे वसूलने' के आरोप हैं. हालांकि एस्सार समूह माओवादियों को किसी तरह की रकम देने से इनकार करता है.

गुरुवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजालविस ने वकील सुधा भारद्वाज की सौपीं गई रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि सोरी कई तरह की बीमारियों से जूझ रही हैं. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने सोरी के जननांगों में पत्थर ठूंसे हैं.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सोरी को दिल्ली के एम्स भेजने का निर्देश दिया.

अक्तूबर 2011 में कोलकाता के एक अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने सर्वोच्च अदालत को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सोरी के शरीर में कुछ बाहरी चीजें पाई गईं. लेकिन यह टीम यह नहीं तय कर पाई कि ये चीजें कैसे उनके जननांगों में डाली गईं.

अपनी अपनी दलीलें

छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से पेश वकील अतुल झा ने कहा कि ये सभी आरोप कुछ स्वार्थी तत्व राज्य पुलिस की छवि को खराब करने के लिए लगा रहे हैं.

Image caption आदिवासी इलाकों में माओवादी तत्व का काफी प्रभाव है

उन्होंने कहा कि सोरी को कम से कम दर्जन भर बार न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया है लेकिन उन्होंने कथित उत्पीड़न के बारे में कुछ भी नहीं कहा.

लेकिन अदालत ने झा की बातों पर ज्यादा तवज्जो दिए बिना सोरी की नए सिरे से मेडिकल जांच का आदेश दिया है.

पिछले साल 20 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सोरी को लगी चोटी पहली नजर में उतनी सीधी-साधी नहीं दिखाई देतीं जैसा बताया जा रहा है, इसीलिए अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार से कोलकाता में सोरी की स्वतंत्र रूप से मेडिकल जांच कराने को कहा.

अदालत सोरी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस पर अपना उत्पीड़न कराने का आरोप लगाया.

सोरी की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजालविस का कहना है कि उनकी मुवक्किल को माओवादियों से जुड़े झूठे मामलों में फंसाया गया है.

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