छत्तीसगढ़ सरकार से संतुष्ट नहीं हैं माओवादी

  • 4 मई 2012
एलेक्स पॉल मेनन
Image caption पहले संकेत मिल रहे थे कि कलेक्टर की रिहाई बिना शर्त हो रही है

छत्तीसगढ़ में अगवा कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन की रिहाई के तुरंत बाद ही माओवादियों के वार्ताकारों ने जाहिर कर दिया है कि सरकार और माओवादियों के बीच हुआ समझौता वैसा नहीं था जैसा कि समझौता दस्तावेज में लिखा था.

कलेक्टर मेनन की रिहाई के लगभग तुरंत बाद माओवादियों की ओर से नियुक्त मध्यस्थ बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल ने चिंतलनार के सीआरपीएफ़ कैंप में ही मीडिया के लिए एक बयान जारी करके सरकार के रवैए पर निराशा जाहिर कर दी.

उन्होंने कहा कि सरकार ने जैसा वादा किया था, उन्हें तीन माओवादी नेताओं को तत्काल रिहा करना चाहिए और पाँच अन्य माओवादी नेताओं के मामले में पुनर्विचार शुरु करना चाहिए.

वार्ताकारों ने 346 लोगों के मामलों पर भी पुनर्विचार का सवाल भी उठाया है.

माओवादियों ने भी एक अलग बयान जारी कर नाराजगी जाहिर की है.

गत 21 अप्रैल से माओवादियों की ओर से अगवा किए गए कलेक्टर की रिहाई के लिए सरकार और माओवादियों की ओर से नियुक्त वार्ताकारों के बीच सहमति बनी और एक समझौता पत्र जारी किया गया तब उसमें इन सब बातों का जिक्र नहीं था.

सब कुछ ठीक नहीं

जब ये समझौता हुआ था उसके बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस समझौते को 'ऐतिहासिक' बताया था और कहा था कि ये समझौता पूरे भारत के लिए 'मॉडल' हो सकता है.

माओवादियों और उनके मध्यस्थों ने सरकार को धन्यवाद दिया था.

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Image caption माओवादियों ने गुरुवार को कलेक्टर की रिहाई में काफी वक्त लगाया था

लेकिन कलेक्टर के रिहा होते-होते माओवादियों और उनके वार्ताकारों के जो बयान सामने आए उससे जाहिर हो गया कि जितना समझौते में था, बात उतनी भर नहीं थी.

माओवादियों की ओर से मध्यस्थता कर रहे बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल ने कहा कि सरकार को तीन माओवादी नेताओं को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए.

वे चाहते हैं कि सरकार वरिष्ठ नेता गोपन्ना के अलावा दो पार्टी कार्यकर्ताओं निर्मलक्का और शांति प्रिया को तत्काल रिहा कर दे. शांति प्रिया माओवादियों के प्रवक्ता गुडसा उसेंडी की पत्नी हैं.

वार्ताकारों का कहना था कि मुख्यमंत्री रमन सिंह ने वादा किया था कि कलेक्टर की रिहाई के एक घंटे बाद निर्मला बुच की अध्यक्षता में बनी एक समिति माओवादियों के मामलों पर पुनर्विचार शुरु कर देगी.

इसके अलावा माओवादियों की ओर गणेश उइके ने भी एक बयान जारी करके इस मामले में नाराजगी जाहिर की है.

इस मामले की पेचीदगी का अनुमान उसी समय होने लगा था जब वार्ताकारों के ताड़मेटला पहुँचने के बाद माओवादियों ने कलेक्टर को तत्काल रिहा नहीं किया था.

अनुमान था कि रिहाई सुबह या अधिकतम दोपहर तक हो जाएगी लेकिन कलेक्टर को रिहा करते-करते शाम ढल गई थी.

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