छत्तीसगढ़ में रिहा हुए कलेक्टर घर पहुँचे

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छत्तीसगढ़ में अगवा हुए कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन गुरुवार को रिहा होने के बाद शुक्रवार की सुबह सुकमा स्थित अपने घर पहुँच गए हैं.

उनके घर पहुँचने पर पटाखे फोड़ कर खुशी जाहिर की गई और आरती उतारकर उनका स्वागत किया गया.

लेकिन दूसरी ओर उनकी रिहाई के लिए सरकार और माओवादियों के बीच हुए समझौते को लेकर विवाद शुरु हो गए हैं और माओवादियों की ओर से नियुक्त मध्यस्थों ने कहा है कि सरकार को कम से कम तीन माओवादी नेताओं को रिहा करना चाहिए.

मध्यस्थों ने वैसे तो गुरुवार को एक बयान जारी किया था लेकिन शुक्रवार को उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसे दोहराया और कहा कि सरकार को अपने आश्वासन के अनुरूप निर्मला बुच समिति की ओर से प्रदेश के विभिन्न जेलों में बंद 347 आदिवासियों के मामलों पर पुनर्विचार की प्रक्रिया शुरु करना चाहिए.

गत 21 अप्रैल से माओवादियों की ओर से अगवा किए गए कलेक्टर की रिहाई के लिए सरकार और माओवादियों की ओर से नियुक्त वार्ताकारों के बीच सहमति बनी और एक समझौता पत्र जारी किया गया तब उसमें इन सब बातों का जिक्र नहीं था.

जब ये समझौता हुआ था उसके बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस समझौते को 'ऐतिहासिक' बताया था और कहा था कि ये समझौता पूरे भारत के लिए 'मॉडल' हो सकता है.

माओवादियों और उनके मध्यस्थों ने सरकार को धन्यवाद दिया था.

लेकिन कलेक्टर के रिहा होते-होते माओवादियों और उनके वार्ताकारों के जो बयान सामने आए उससे जाहिर हो गया कि जितना समझौते में था, बात उतनी भर नहीं थी.

वार्ताकारों की मांग

वार्ताकारों का कहना था कि मुख्यमंत्री रमन सिंह ने वादा किया था कि कलेक्टर की रिहाई के एक घंटे बाद निर्मला बुच की अध्यक्षता में बनी एक समिति माओवादियों जेल में बंद आदिवासियों के मामलों पर पुनर्विचार शुरु कर देगी.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बीडी शर्मा ने कहा कि कलेक्टर की रिहाई तक तो शाम हो गई थी इसलिए उसके एक घंटे बाद तो निर्मला बुच समिति का बैठना संभव नहीं था लेकिन अब उम्मीद की जानी चाहिए कि समिति इस पर विचार करेगी.

हालांकि उन्होंने पत्रकारों के इस सवाल पर नकारात्मक जवाब दिया कि कलेक्टर की रिहाई के लिए जो समझौता हुआ था उसके पीछे भी कोई समझौता था.

प्रोफ़ेसर हरगोपाल ने कहा, "और कोई समझौता नहीं था और न सरकार ने कोई वादा किया था लेकिन एक अंडरस्टैंडिंग थी."

इसका ब्यौरा देते हुए उन्होंने कहा, "हमने सरकार को छह माओवादियों की सूची दी थी और कहा था कि इनमें से जिन पर भी कम मामले हों और सरकार के लिए जिन लोगों को रिहा करना आसान हो, उन तीन लोगों को रिहा कर देना चाहिए."

वार्ताकारों या मध्यस्थों ने माओवादियों के नाम बताने से इनकार कर दिया. लेकिन कहा जाता है कि माओवादी चाहते हैं कि सरकार वरिष्ठ नेता गोपन्ना के अलावा दो पार्टी कार्यकर्ताओं निर्मलक्का और शांति प्रिया को तत्काल रिहा कर दे. शांति प्रिया माओवादियों के प्रवक्ता गुडसा उसेंडी की पत्नी हैं.

प्रोफेसर हरगोपाल ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जेलों में सैकड़ों आदिवासी कैद हैं, उनके पास वकील भी नहीं है इसलिए उनके मामलों पर विचार करने की जरुरत है और सरकार ने आश्वासन दिया है कि निर्मला बुच समिति इस पर विचार करेगी.

फिर कार्रवाई शुरु

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Image caption माओवादियों ने सरकार के रवैए पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए एक बयान जारी किया था

कलेक्टर के अगवा होने के बाद माओवादियों की ओर से जो मांगें उठाई गई थीं उसमें ऑपरेशन ग्रीन हंट रोकना भी था.

हालांकि सरकार इस बात से इनकार करती है कि ऑपरेशन ग्रीन हंट जैसी कोई कार्रवाई हो रही थी लेकिन सरकार ने माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैनात सभी सुरक्षाबल कर्मियों को वापस बैरकों में बुला लिया था.

कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन की वापसी के बाद चिंतलनार में सुकमा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक शांडिल्य से लंबी चर्चा की.

इस चर्चा के बाद अधिकारियों ने कहा है कि माओवादियों के खिलाफ जो भी कार्रवाई पहले चल रही थी वह आगे भी जारी रहेगा.

इसका अर्थ ये लगाया जा रहा है कि कलेक्टर के रिहा होते ही माओवादी और सरकार अपने अपने रास्ते चल पड़े हैं.

राष्ट्रीय नीति बनें

Image caption रमन सिंह का कहना है कि नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए सभी राज्य साथ आएं.

इस बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन की रिहाई पर खुशी जताई है और कहा है कि नक्सलवाद के समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की जरूरत है.

शुक्रवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "नक्सलवाद किसी एक राज्य कि समस्या नहीं है और न ही इसे किसी एक राज्य द्वारा हल किया जा सकता है. मैं प्रधानमंत्री जी से आग्रह करूंगा कि वो सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाए जो इस मुद्दे पर चर्चा करे और एक राष्ट्रीय नीति बनाए."

साथ ही रमन सिंह ने कहा, "ये मेरी व्यक्तिगत राय है कि ऐसी नीति हो कि चाहे किसी का भी अपहरण हो, चाहे वो मुख्यमंत्री ही क्यों न हो, किसी को नहीं छोड़ा जाएगा."

यह पूछे जाने पर कि क्या छत्तीसगढ़ की सरकार कलेक्टर की रिहाई के बाद नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई रोकेगी मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि बंदूक रखने के बाद ही कार्रवाई रोकी जा सकती है.

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