'कमाने नहीं, खिदमत के लिए बैठे हैं'

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Image caption युनानी हकीम डा. जुनैद कहते हैं कि युनानी दवाएं, एलोपैथी दवाओं की तरह नुक्सानदेह नहीं होतीं.

विभिन्न पेशों से जुड़े पेचीदे सवालों का जवाब आप तक पहुंचाने के लिए हर शनिवार बीबीसी हिंदी सेवा आपकी मुलाकात ऐसे पेशेवर व्यक्तियों से करवाएगी, जिनका काम अपने आप में अनूठा हो.

इस कड़ी में युनानी हकीम डा. इब्राहिम अली जुनैद से बात की बीबीसी संवाददाता उमर फारूख ने.

आपने इस पेशे को क्यों चुना ?

मैं लोगों की खिदमत कर सकूं और लोगों को फायदा पहुंचा सकूं, इस पेशे की तरफ से. युनानी इलाज बिल्कुल नुक्सानदेह नहीं होता जैसा कि एलोपैथी में देखते हैं.

आमतौर पर लोग युनानी हकीम या इस पेशे को कमतर बनाकर पेश करते हैं, लोग समझते हैं कि इसमें कोई खास आमदनी नहीं होती.

लोग ये सोचते हैं कि ये फन कमतर होता है. लोगों का नजरिया तब्दील करना जरूरी है क्योंकि जो लोग एलोपैथी की तरफ जा रहे हैं, उन्हें ये भी सोचना जरूरी है कि एक पैरासिटेमॉल खाने से उनके लिवर या जिगर पर कितना असर पड़ता है. हमारी दवाओं से किसी और अंग को नुक्सान नहीं होता बल्कि जिस चीज के लिए दवा दी जाती है, उसी पर असर करती है.

एक बात और जो लोग सोचते हैं कि इसमें कमाई नहीं होती तो आप कमाने के लिए नहीं बैठे हैं, आप खिदमत के लिए बैठे हैं, ये जज्बा आना जरूरी है. जब आपकी प्रैक्टिस अच्छी हो जाएगी तो आप खुद-ब-खुद कमाने लगेंगे.

युनानी हकीम बनने के लिए क्या पढ़ाई करनी होती है.

बीयुएमएस की पढ़ाई के लिए उर्दू आना सबसे जरूरी है. तो जो लोग इंटर में दाखिला ले रहे हैं, वो अपनी दूसरी भाषा उर्दू लें. इसके लिए एक प्रवेश परीक्षा होती है जो आंध्रप्रदेश में डा.एनटीआर विश्वविद्यालय, विजयवाडा, द्वारा कराया जाता है. इसमें 125 सीटें हैं जिनमें 75 सीट गवर्मेंट निजामिया तिब्बी कॉलेज में और 25 सीट करनूल में कॉलेज में हैं. दाखिला रैंक के आधार पर होता है, इसमें चंदा देकर दाखिला नहीं लिया जा सकता.

आंध्रप्रदेश के अलावा भारत के किन राज्यों में ये कोर्स किया जा सकता है.

उत्तरप्रदेश, कर्टानक और मध्यप्रदेश में भी बीयुएमएस का कोर्स किया जा सकता है. इन जगहों पर सरकारी के साथ ही निजी कॉलेज भी हैं. वहां दाखिले के कुछ अलग प्रावधान भी हैं जैसे मौलवी का कोर्स करने के बाद भौतिक विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और जंतु विज्ञान के कोर्स लेने से बीयुएमएस में दाखिला ले सकते हैं.

एक युनानी हकीम औसतन कितना कमा लेता है.

ये तो प्रैक्टिस पर निर्भर करता है. मैं सुबह और शाम, दोंनो समय, लगभग 30-35 मरीज देखता हूं यानी पूरे दिन में 60 से 65 मरीज. मेरी फीस तीस रूपए है. कभी मरीज कम भी हो सकते हैं कभी ज्यादा भी होते हैं. एलोपैथी से तुलना करें तो कमाई बराबर ही रहती है.

इस पेशे में आने के लिए कौन सी खूबी होना सबसे जरूरी है.

आदमी के अंदर लोगों की सेवा करने की भावना हो और उसका किरदार मजबूत हो. युनानी हकीम को पैसों की तरफ आकर्षण नहीं बल्कि लोगों की सेहत का ध्यान होना चाहिए.

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