एनसीटीसी केंद्र बनाम राज्य नहीं: मनमोहन

चिदंबरम के साथ जयललिता
Image caption एनसीटीसी का कई मुख्यमंत्री विरोध कर रहे हैं

राष्ट्रीय आंतकवाद निरोधक केंद्र यानी एनसीटीसी की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है कि एनसीटीसी केंद्र बनाम राज्यों का मुद्दा नहीं है.

मनमोहन सिंह का कहना है कि एनसीटीसी को बनाने का मुख्य उद्देश्य भारत जैसे विशाल देश में आतंकवाद से लड़ने के प्रयासों का समन्वय करना है जो अब तक इंटेलिजेंस ब्यूरो करता रहा है.

ये बात प्रधानमंत्री ने शनिवार को इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए बुलाई गई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक में कही.

इस मुद्दे पर कई राज्यों के मुख्यमंत्री केंद्र का विरोध कर रहे हैं. मुख्यमंत्रियों का कहना है कि प्रस्तावित एनसीटीसी देश के संघीय ढांचे के विरुद्ध है और राज्यों के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास है.

लेकिन मनमोहन सिंह का कहना था कि आंतकवाद आज हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ सबसे बड़ा खतरा है. केंद्र और राज्य इससे अकेले नहीं लड़ सकते इसलिए इस के लिए सहयोग और समन्वय की जरूरत है. उन्होंने कहा, "एनसीटीसी के बेहतर तरीके से काम करने के लिए जरूरी है कि उसके अधिकारों और कामकाज पर आम सहमति बने. हम चाहते हैं कि इस मुद्दे पर राज्य सरकारें हमारा साथ दें. हम मु्ख्यमंत्रियों के सुझावों का भी स्वागत करते हैं."

बैठक में केंद्र सरकार राज्य सरकारों का समर्थन लेने की कोशिश करेगी.

बैठक को संबोधित करते हुए गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आंतकवाद के खिलाफ लड़ाई केंद्र और राज्यों की साझा जिम्मेदारी बताया. एनसीटीसी पर सहमति जुटाने के प्रयासों को बल देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि आंतकवादी राज्यों या देशों की सीमाओं को नहीं मानते.

गृह मंत्रालय की इस महत्वाकांक्षी लेकिन विवादित योजना का विरोध न सिर्फ नवीन पटनायक, जे जयललिता और नीतीश कुमार जैसे विपक्षी दल के मुख्यमंत्री कर रहे हैं बल्कि यूपीए की घटक दल तृणमूल कॉंग्रेस की ममता बनर्जी भी इसके खिलाफ है.

ममता बनर्जी ने कहा, "आप संघीय ढांचे की सीमाएं नहीं लाघ सकते. एनसीटीसी संघीय ढांचे में हस्तक्षेप है. इस मामले पर कोई चर्चा नहीं हुई और सिर्फ सूचना दे दी गई. ये ठीक नहीं है."

विरोध

मुख्य विपक्षी दल भाजपा और एनडीए भी इस मुद्दे के विरुद्ध खड़े हैं.

भाजपा के प्रकाश जावड़ेकर कहते हैं, "आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई सभी करना चाहते है. लेकिन आतंकवाद के खिलाफ की ये लड़ाई राज्यों के खिलाफ लड़ाई हो रही है. राज्यों के अधिकारों का सीधा अपहरण करने की जो कोशिश हो रही है इससे सभी पार्टियां गुस्सा है."

लेकिन केंद्र इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

गृह मंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि एनसीटीसी पूरी तरह से जरूरी है औऱ ये संघीय ढांचे पर हमला नहीं है.

उन्होंने ये भी कहा है कि दो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेस यानी एसओपी के मसौदे राज्यों को दिए गए हैं. बैठक में इन एसओपी पर राज्य सरकार के सुझावों को सुना जाएगा.

नो़डल एजेंसी

असल में ये एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी, रिसर्च एंड एनेलिसिस विंग यानी रॉ, ज्वाइंट इंटेलिजेंस कमिटी और राज्यों के खुफिया एजेंसियों के लिए नोडल एजेंसी का काम करेगी और आईबी के तहत आएगी.

इस एजेंसी को आतंकवाद से जुड़े किसी भी मामले में देश के किसी भी भाग में तलाशी लेने और गिरफ्तारी करने का अधिकार होगा.

जबकि संविधान के अनुसार कानून व्यवस्था राज्य का अधिकार है और केंद्र की एजेंसियां राज्यों की अनुमतियों के बिना राज्य में कोई भी कार्रवाई नहीं कर सकती.

बीएसएफ के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह के अनुसार समस्या राज्य सरकारों के अधिकारों के अतिक्रमण की नही बल्कि एनसीटीसी के प्रस्तावित अधिकारों की है.

उन्होंने कहा, "चिदंबरम साहब ने जो एनसीटीसी बनाया है इसमें प्रेरणा तो अमरीका की एनसीटीसी से लिया लेकिन उन्होंने अधिकार अमरीका की एजेंसी से भी ज्यादा दे दिए.

लेकिन जहां तक संघीय ढांचो का सवाल है तो इन मुख्यमंत्रियों से पूछा जाए कि आतंकवाद, नक्सलवाद यहां तक किसी भी छोटी समस्या से निपटने के लिए आप केंद्रीय बल मांगते है. शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी भूल जाते है लेकिन जब एनसीटीसी की बात होती है तो वो संघीय मुल्यों की बात क्यों करते हैं."

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