राजस्थान बीजेपी में घमासान, वसुंधरा ने इस्तीफे की धमकी दी

भाजपा चुनाव चिन्ह (फाइल फोटो) इमेज कॉपीरइट AP
Image caption वसुंधरा राजे और संघ हमेशा से एक दूसरे का विरोध करते रहें हैं.

राजस्थान में एक रथयात्रा को लेकर प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी में गंभीर मतभेद उभर आए है.

प्रतिपक्ष की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने धमकी दी है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वो इस्तीफा दे सकती है.

ये सूरत तब बनी जब शनिवार को पार्टी की कोर कमिटी की बैठक में पूर्व गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया की प्रस्तावित रथ यात्रा को लेकर नेताओ में विवाद हो गया.

वसुंधरा राजे के समर्थक इस यात्रा का विरोध कर रहे है.

जयपुर में चल रही कोर कमेटी की बैठक बीच में ही छोड़कर वसुंधरा नाराजगी का भाव लिए बाहर आई और कहा कि मौजूदा हालात में इस रथ यात्रा को रोकना चाहिए.

उनका कहना था, ''मैं अगर बैठक में कार्यकर्ताओ की बात नहीं रख पाती हूं तो मुझे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे देना चाहिए. मैं अपना इस्तीफा बाद में भेज दूंगी.''

रथ यात्रा

ये कहते हुए वसुंधरा अपने निवास के लिए रवाना हो गईं.

वसुंधरा के जाने के लगभग आधे घंटे बाद कटारिया भी बाहर आए और वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कहा, ''मेरी यात्रा से नाराज होकर वसुंधरा जी ने इस्तीफा दिया है. मैं पार्टी और संगठन का सच्चा सिपाही हूं. संगठन को एक बनाए रखने के लिए मैं अपनी यात्रा निरस्त कर रहा हूं.''

गुलाब चंद कटारिया ने विगत दो मई से आदिवासी बहुल दक्षिण राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में मेवाड़ यात्रा निकालने की घोषणा की थी, जिसका वसुंधरा समर्थक और प्रदेश भाजपा की महासचिव किरण माहेश्वरी ने विरोध किया था. इसके बाद ये मामला पार्टी आलाकमान के पास दिल्ली पहुंचा.

पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने सबको दिल्ली बुलाकर पांच मई तक यात्रा को टालने और शनिवार को ही कोर कमेटी की बैठक करके इसको सुलझाने का निर्देश दिया था.

इसीलिए शनिवार को कोर कमेटी की बैठक हो रही थी.

मगर इस बैठक में कटुता और भी बढ़ गई.

प्रेक्षकों के अनुसार कटारिया के साथ आर आर एस समर्थक है और पार्टी साफ साफ दो धडो में बंट गई है.

कोर कमिटी की बैठक में वसुंधरा राजे के साथ किरीट सोमैय्या, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, कप्तान सिंह सोलंकी और सांसद भूपेंद्र यादव मैजूद थे. मगर ये बैठक कोई समाधान नहीं ढूंढ पाई. राजे अपने समर्थको के साथ काफी नाराजगी की हालत में बाहर जाते दिखाई दी.

राजे ने कहा ''मेरा सुझाव था कि यात्रा पुरे संघटन और कार्यकर्ताओ को साथ लेकर चले, अगर यात्रा कार्यकर्ताओ को बांटती है तो ऐसी यात्रा से क्या फायदा है.''

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रथ यात्रा बीजेपी का प्रिय विषय रहा है, मगर इस रथ यात्रा ने अपनी ही पार्टी में अप्रिय सूरत पैदा कर दी है.

संबंधित समाचार