नीतीश-नरेंद्र मोदी का मिलन विपक्ष को खटका

  • 6 मई 2012
नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार एनसीटीसी की बैठक में आमने-सामने हुए

दिल्ली में एनसीटीसी पर मुख्यमंत्रियों की बैठक के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाना कई पार्टियों को नागवार गुजरा है.

बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने तो इस मामले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है.

पार्टी ने उनकी धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नीतीश कुमार का असली चेहरा यही है.

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता राष्ट्रीय जनता दल के अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा, "नरेंद्र मोदी के खिलाफ नीतीश कुमार का गुस्सा राजनीतिक पाखंड है. वे लोगों को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं. वे सार्वजनिक जीवन और निजी जीवन दोनों में अच्छे मित्र हैं."

आलोचना

कांग्रेस ने भी नीतीश कुमार की आलोचना की है. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक चौधरी ने कहा, "जिस तरह नीतीश कुमार मुस्कुराते हुए नरेंद्र मोदी से मिले और पुराने मित्र की तरह उनसे हाथ मिलाया, उससे नरेंद्र मोदी के खिलाफ रुख में नीतीश कुमार का दोहरा मानदंड साबित हो गया है."

दूसरी ओर नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) इस घटना को ज्यादा अहमियत नहीं दे रही है.

पार्टी नेता रवींदर कुमार ने कहा, "एनसीटीसी की बैठक में नरेंद्र मोदी से हाथ मिलना एक शिष्टाचार था, इससे ज्यादा नहीं."

वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव और फिर वर्ष 2010 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार और उनकी पार्टी ने बिहार में नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार का विरोध किया था, जिस कारण वे वहाँ नहीं गए.

करीब तीन साल पहले नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के बीच मतभेद उस समय शुरू हुए थे, जब नीतीश कुमार ने अखबार में छपे उस विज्ञापन पर नाराजगी जताई थी, जिसमें उन्हें और मोदी को एक साथ दिखाया गया था.

बाद में नीतीश कुमार ने 2008 में आई बाढ़ के बाद राहत कार्यों के लिए गुजरात सरकार की ओर से दी गई सहायता राशि को भी लौटा दिया था.

संबंधित समाचार