मधुमक्खियों के मारे सैनिक बेचारे

Image caption छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति पुलिस के लिए चुनौती है

छत्तीसगढ़ में यूं तो जवानों को सबसे अधिक खतरा माओवादियों से है लेकिन नारायणपुर में मधुमक्खियों ने ही 19 जवानों को घायल कर दिया है.

खबरों के अनुसार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के इन घायल जवानों को नारायणपुर जिला अस्पताल में भरती कराया गया है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह घटना रविवार की है जब जवान नियमित गश्त पर थे. इसी दौरान जोर की आंधी चलने लगी और जंगल में बना मधुमक्खियों का छत्ता टूट गया. मधुमक्खियों नें गश्त लगा रहे जवानों पर हमला कर दिया जिससे वह घायल हो गए.

ये जवान नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ के इलाके के फरसगांव में तैनात है.

नक्सल विरोधी अभियान के लिए छत्तीसगढ़, उड़ीसा और झारखंड के जंगलों में तैनात किये गए सुरक्षा बलों के जवानों के लिए इन इलाकों की भौगोलिक स्थिति ही काफी चुनौती भरी है.

जंगलों की वजह से यहाँ जंगली जानवरों के हमले के डर के साथ साथ सांप और बिच्छू के काटने की भी आशंका बनी रहती है.

मगर पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि जंगल में कीड़ों से बचने के ज्यादा उपाय नहीं हैं. मधुमक्खियों, दूसरे ज़हरीले कीड़ों और मच्छरों से भी जवान काफी परेशान हैं.

अधिकारियों का कहना है कि नक्सली हमले में जितने जवान मारे जाते होंगे लगभग उतने ही इन इलाकों में मलेरिया से भी मरते हैं.

हालांकि अधिकारी सुरक्षा बलों के कैम्पों में मच्छरदानियों की व्यवस्था किये जाने की बात कह रहे हैं, मगर जवान कीड़े मकोडों का शिकार तब होते हैं जब वह जंगलों में पैदल गश्त करते हैं.

एक अधिकारी का कहना था कि मच्छरदानियों का इस्तेमाल तो सिर्फ सोते वक़्त किया जाता है. मगर जब जंगल में अभियान पर जवान निकलते हैं तो कीड़ों और मच्छरों के हमले आम बात है. उसका कोई उपाय नहीं है.

छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा को मलेरिया के मामले में सबसे संवेदनशील इलाका माना जाता है.

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