एयर इंडिया के 10 पायलट बर्खास्त

  • 8 मई 2012
एयर इंडिया (फाइल)
Image caption हड़ताल के कारण कई सेवाएं कैंसिल हुई हैं जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है.

पायलटों के 'खुद को बीमार बताकर' कल देर रात से हड़ताल पर चले जाने पर कड़ा रवैया अख्तियार करते हुए एयर इंडिया प्रबंधन ने 10 पायलटों बर्खास्त कर कर दिया है.

प्रबंधन ने पायलटों के यूनियन इंडियन पायलट्स गिल्ड की मान्यता भी रद्द कर दी है.

विमान कंपनी के एक प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा कि यूनियन के दफ्तर को सील किया जा रहा है.

एयर इंडिया के पायलटों का एक समूह कल रात 'खुद को बीमार बताकर' काम पर नहीं गया और इस तरह से कुछ महीनों के भीतर ही भारत की सरकारी विमान कंपनी में एक बार फिर से हड़ताल शुरू हो गई.

खबर थी कि हड़ताल पर जानेवाले पायलटों की संख्या 100 थी हालांकि एयर इंडिया प्रबंधन का कहना है कि कुल 40 पायलटों ने खुद को बीमार बताया था.

प्रवक्ता का कहना था कि हड़ताल के कारण विमान कंपनी को चार उड़ान सेवाएं रद्द करनी पड़ीं.

गैर कानूनी

नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह जिन्होंने पिछली दफा हड़ताल समाप्त करवाने में अहम भूमिका निभाई थी पायलटों के कदम से भारी नाराज दिखे और उन्होंने कहा है कि हड़ताल 'गैर-कानूनी' है.

अजित सिंह ने कहा, "उन्होंने हड़ताल के लिए किसी तरह का नोटिस नहीं दिया है और खुद को बीमार बताया है. अगर उन्हें कुछ दिक्कते हैं तो उसका हल निकालने के लिए जो बातचीत चल रही थी उसे जारी रखना चाहिए था."

उन्होंने कहा, "एक ऐसे वक्त में जब उन्हें 30,000 करोड़ रूपए की सहायता दिए जाने का फैसला लिया गया है, ये पैसा जनता का है, उन्हें ये ध्यान रखना चाहिए कि यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत पेश न आए, जो फिलहाल हो रही है."

विमान क्षेत्र के जानकार जितेंद्र भार्गव का भी मानना है कि ऐसे समय में जब प्रबंधन और मंत्रालय स्तर पर यूनियन से बातचीत जारी थी तो पायलटों का हड़ताल का सहारा लेना गलत था.

जितेंद्र भार्गव ने बीबीसी से कहा कि सरकार ने हाल में ही कंपनी को आर्थिक दिक्कतों से उबराने के लिए 30,000 करोड़ रूपयों का कर्ज देना स्वीकार किया है, ऐसे वक्त कर्मचारियों को विमान कंपनी की साख बनाने और आर्थिक हालात सुधारने की ओर ध्यान देना चाहिए न की जब मौका मिले हड़ताल पर चेल जाने का.

ड्रीमलाइनर

सोमवार आधी रात से एयर इंडिया के पायलटों के एक समूह ने खुद को बीमार बताकर हड़ताल शुरू कर दिया है. कहा जा रहा है कि और पायलट भी उनके साथ जा सकते हैं.

अचानक से हुई इस हड़ताल से पैसेंजरों के काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ये छुट्टियों का समय है और काफी लोगों ने एयर लाईन पर बुकिंग करवा रखी है.

ये हड़ताल पायलटों के उस यूनियन के सदस्यों ने किया है जो एयर इंडिया के साथ थे.

कुछ सालों पहले सरकार के एक फैसले के बाद सरकार की दो विमान कंपनियों - एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस को मिलाकर एक कंपनी बना दी गई थी.

हड़ताल पर गए एयर इंडिया के पायलट उस फैसले का विरोध कर रहे हैं जिसके तहत वो इंडियन एयरलाइंस के पायलटों को एक नए किस्म के विमान पर ट्रेनिंग दिए जाने की मुखालिफत कर रहे हैं.

कंपनी को नए 787 ड्रीमलाइनर अगले महीने से मिलने शुर हो जाएंगे और साल के अंत तक उसके पास पांच से छह विमान मौजूद होंगे जिसकों उड़ाने के लिए पायलटों को ट्रेनिंग दी जानी है.

कंपनी ने कहा कि एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के पायलटों को ट्रेनिंग में 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी दी जाएगी यानी जितने लोग प्रशिक्षित किए जाएंगे उसमें दोनों पुरानी कंपनियों के पायलट होंगे.

मगर एयर इंडिया पायलटों का यूनियन फैसले के खिलाफ अदालत चला गया. चंद दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में आखिरी निर्णय प्रबंधन का होगा.

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