पुलिस अफसरों के बयानों पर घिरी यूपी सरकार

  • 9 मई 2012
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Image caption पुलिस अफसरों के बयानों पर उत्तर प्रदेश सरकार को मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ा है.

उत्तर प्रदेश में दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अपने विवादास्पद बयानों से अखिलेश यादव सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.

पहले तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तैनात एक पुलिस अफसर ने एक परेशान पिता से कह दिया कि अगर उनकी बहन किसी के साथ भाग जाती तो वो उन्हें गोली मार देते.

दूसरा मामला पूर्वी उत्तर प्रदेश का है जहां एक पुलिस अफसर ने कहा कि उनके जिले में 70 फीसदी मामले लड़कियों के गायब होने के आते हैं . “पुलिस लडकियां खोजें या चोर पकडे.”

उत्तर प्रदेश के आला पुलिस अधिकारी फिलहाल तथ्यों का पता लगाने की मांग कर रहे हैं, जबकि सामाजिक संगठन पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

'ऑनर किलिंग को बढ़ावा'

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर रेंज के पुलिस उप-महानिरीक्षक सतीश कुमार माथुर मुजफ्फरनगर के पास शामली में पुलिस के कामकाज की जांच करने गए थे. वहां कसेरवा गांव के शौकीन नाम के एक व्यक्ति ने उनसे मिलकर गुहार लगाई कि गांव के कुछ लोग उनकी बेटी को भगा ले गए हैं और उन्हें बरामद करने में पुलिस उनकी मदद करे.

खबरों के मुताबिक पुलिस डीआईजी ने परेशान पिता से कहा कि इस तरह बेटी का भागना बहुत शर्म की बात है. बातों बातों में डीआईजी ये भी कह गए कि अगर उनकी बहन इस तरह घर से भागती तो वो या तो खुद को गोली मार लेते या बहन को मार देते.

डीआईजी माथुर की इस बात को शामली के एक पत्रकार ने अपने वीडियो कैमरे में दर्ज कर लिया.

डीआईजी का ये विवादास्पद बयान टीवी न्यूज चैनलों में ऐसे दिखाया गया कि यूपी पुलिस इस तरह के बयान से इज्जत के नाम पर कत्ल यानी ऑनर किलिंग को बढ़ावा दे रही है.

कार्रवाई की मांग

लखनऊ में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जगमोहन यादव ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि डीआईजी ने पीड़ित पिता को पूरी मदद का भरोसा दिलाया और उन्होंने इस तरह की बात से इनकार किया है.

सवालों की बौछार होने पर जगमोहन यादव ने माना कि अगर कोई बालिग लड़की अपनी मर्जी से किसी के साथ शादी कर लेती है तो इस तरह की बात करना गैरकानूनी है.

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Image caption पुलिस अफसरों के बयानों को जरिया बना कर विपक्ष राज्य की अखिलेश यादव सरकार पर निशाना साध रहा है.

यादव ने कहा , “मालूम हो रहा है कि लड़की बालिग है. वो अच्छे बुरे का निर्णय करने में सक्षम है. उसने निर्णय ले लिया है. कौन होता है खुद को गोली मारने वाला, कौन होता है उसको गोली मरने वाला? किसी का क्या अधिकार है? यह तो कानूनन गलत है.”

यादव ने आगे कहा, “ऐसे इलाके में जहां ऑनर किलिंग की घटनाएं बहुत होती रहती हैं, वहां पर इस तरह की बात अगर की गई है तो ये गलत है. लड़का बालिग हो, लड़की बालिग हो, फिर सामाजिक रूप से आपको अच्छा लगे या बुरा, कानूनी रूप से आप कुछ नही कर सकते. कानून ने अधिकार दिया हुआ है.”

विपक्ष को मुद्दा मिला

जब पूछा गया कि क्या डीआईजी के खिलाफ कार्रवाई होगी या नही, तो यादव ने कहा कि इस मामले की जांच कराकर तथ्यों का पता लगाया जाएगा और जरूरत हुई तो आगे कार्रवाई भी की जाएगी.

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष मामता शर्मा ने डीआईजी माथुर को निलंबित कर कार्रवाई करने की मांग की है.

अभी शामली का मामला शांत भी नही हुआ था कि संत कबीरनगर जिले के पुलिस कप्तान को टीवी न्यूज चैनल पर यह कहते हुए दिखाया गया कि उनके जिले में दर्ज मामलों में “70 फीसदी लड़कियों के भागने से संबंधित हैं, अब पुलिस लड़कियां बराबद करे या चोर पकड़े.” इस बयान के बाद पुलिस कप्तान और जिला मजिस्ट्रेट जोर से हंसते हुए दिखाए गए हैं.

दोनों मामलों में आला पुलिस अफसरों के बयानों के कारण विपक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर कटाक्ष कर रहा है. लेकिन सरकार ने अभी तक खामोश रहना ही बेहतर समझा है.

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