हत्याकांड, 'दमन की नीति' के खिलाफ बिहार बंद

  • 10 मई 2012
नीतीश कुमार
Image caption प्रदेश में कई जगह मुख्यमंत्री नितीश कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए

बिहार के औरंगाबाद में एक पंचायत मुखिया की हत्या के खिलाफ हाल में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस के कथित दमनकारी रवैए से परेशान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एम-एल) के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को बिहार बंद का आयोजन किया.

बंद के कारण कई जगहों पर सड़क परिवहन और रेल सेवाओं में बाधा आई और सामान्य जन-जीवन प्रभावित हुआ.

बड़ी तादाद में सीपीआई (एम-एल) के कार्यकर्ताओं ने राज्य भर में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किए और मुख्यमंत्री नितीश कुमार के ख़िलाफ़ नारे लगाए.

ये कार्यकर्ता औरंगाबाद ज़िले में हाल में सोन्हाथू पंचायत के मुखिया देवेंद्र कुमार सिंह ऊर्फ छोटू जयस्वाल की हत्या के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ हुई पुलिस कार्रवाई पर रोष ज़ाहिर कर रहे थे.

रेलगाड़ियों को घटों तक रोका

अन्य वामपंथी दलों ने भी बंद के इस आयोजन में सक्रिय सहयोग दिया. कहीं-कहीं राष्ट्रीय जानता दल और लोक जनशक्ति पार्टी के भी कार्यकर्ता समर्थन में सड़कों पर उतरे.

मध्य बिहार के औरंगाबाद, भोजपुर, जहानाबाद, रोहतास और उत्तर बिहार के दरभंगा, समस्तीपुर और सिवान ज़िलों में बंद का प्रभाव ज़्यादा दिखा.

इन इलाक़ों में कई रेलगाड़ियों को घंटों तक रोक कर रखा गया. प्रदर्शनकारी मांग कर रहे थे कि औरंगाबाद के ज़िलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को बर्खास्त किया जाए और वहाँ सीपीआई (एम-एल) के कार्यकर्ताओं पर दमन की कार्रवाई फ़ौरन बंद हो.

पटना में बंद के समर्थन में निकले जुलूस का नेतृत्व करते हुए पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने राज्य सरकार पर कई आरोप लगाए, "नितीश राज में भ्रष्टाचारियों और अपराधियों को खुली छूट मिली हुई है और जब लोग विरोध में सड़कों पर उतरते हैं तो पुलिस-प्रशासन द्वारा उन्हें बेरहमी से कुचला जा रहा है."

उधर लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान ने भी दावा किया है कि बिहार में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है.

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