कार्टून पर हंगामे के बाद दो सलाहकारों का इस्तीफ़ा

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Image caption कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसी पाठ्य पुस्तकों की बिक्री तुरंत प्रभाव से रोक दी गई है

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी की 11वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के कार्टून पर शुक्रवार को मचे हंगामे के बाद एनसीईआरटी के दो सलाहकारों ने अपना पद छोड़ दिया है.

योगेंद्र यादव और सुहास पालशिकर ने शुक्रवार देर शाम एनसीईआरटी के सलाहकार पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

दरअसल एनसीईआरटी के 11वीं कक्षा की भारतीय संविधान पर पाठ्य पुस्तक में मशहूर कार्टूनिस्ट के शंकर पिल्लई का उकेरा एक कार्टून छपा है.

साल 1949 में छपे इस कार्टून में डॉक्टर अंबेडर एक चाबुक लिए एक घोंघे पर बैठे हैं जबकि उनके पीछे उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी चाबुक लिए खड़े हैं. कार्टून का मकसद संविधान लिखने की प्रक्रिया में हुई कथित देरी को दर्शाना लगता है.

प्रोफेसर सुहास पालशिकर ने दोनों के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए एक निजी भारतीय समाचार चैनल को बताया कि संसद में जो कुछ हुआ उससे पता चलता है कि पाठयक्रम की पुस्तकें किस तरह लिखी जाएं इसको लेकर उनके और सासंदों के बीच मतभेद हैं और इसलिए वो अपना पद छोड़ रहे हैं.

पालशिकर ने कहा, “ये बहुत दुखद है लेकिन हमें इस बात का अहसास है कि भारत में संसद सर्वोच्च है इसलिए मैंने सदन और सांसदों की भावना का ख्याल रखते हुए अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है.”

संसद में उठा मुद्दा

शुक्रवार को जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तमिलनाडु की वीसीके पार्टी के सांसद तिरुमावलवन थोल अध्यक्ष की कुर्सी के पास आ गए. उन्होंने हाथ में तख्ती उठा रखी थी जिसमें लिखा था कि एनसीईआरटी की 11वीं कक्षा की पाठ्य पुस्तक में डॉक्टर अंबेडकर का कार्टून है जिससे उनका अपमान हुआ है.

तिरुमावलवन ने कहा कि जिस तरह का कार्टून बना है वो 'अंबेडकर, नेहरू और पूरे देश का अपमान है.'

सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने कहा कि पाठ्यपुस्तक में कार्टून छपना पूरी तरह गलत है और वह इस मामले में सदन की भावनाओं का सम्मान करते हैं.

फिर कपिल सिब्बल ने दोपहर बाद आकर सदन में बयान दिया और कहा कि पाठ्य पुस्तकों के हर कार्टून की समीक्षा की जाएगी और अगले साल से इस तरह के कार्टून हटा लिए जाएँगे. उन्होंने बताया कि उस पुस्तक की बिक्री तुरंत प्रभाव से रोक दी गई है.

सिब्बल ने माना कि कार्टून आपत्तिजनक है और कहा कि पाठ्य पुस्तकों में इस तरह के कार्टून को देखकर हटाने के बारे में एक समिति का गठन कर दिया गया है.

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