अंबेडकर का कार्टून: पलशिकर के दफ्तर में तोड़-फोड़

कपिल सिब्बल इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption कपिल सिब्बल ने संसद में इस प्रकरण में माफी माँगी थी

एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तक में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के कार्टून से जुड़े विवाद में संस्था के सलाहकार पद से इस्तीफा दे चुके प्रोफेसर सुहास पलशिकर के पुणे स्थित दफ्तर में कुछ लोगों ने तोड़-फोड़ की है.

पुलिस के अनुसार पलशिकर ने कार्टून पर आपत्ति जाहिर करने वाले लोगों को चर्चा के लिए दफ्तर बुलाया था और वे ही लोग इस तोड़-फोड़ में शामिल माने जा रहे हैं.

पुणे विश्वविद्यालय परिसर स्थित उनके दफ्तर में इन लोगों ने फर्नीचर तोड़ दिए.

पुलिस के अनुसार पलशिकर को इसमें चोट नहीं आई है.

कार्टून विवाद पर कार्टूनिस्ट राजेंद्र धोड़पकर का नजरिया

रिपब्लिकन पैंथर ऑफ इंडिया नाम के संगठन के एक प्रवक्ता ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और कहा है कि वह कार्टून दलित नेता अंबेडकर का 'अपमान' करता है.

पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया है.

हंगामा

पुणे विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग के पूर्व प्रमुख पलशिकर ने संसद में इस मुद्दे पर शुक्रवार को हुए हंगामे के बाद इस्तीफा दे दिया था.

इस मुद्दे पर शुक्रवार को संसद में काफी हंगामा हुआ था जिसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने माफी माँगी.

सिब्बल ने कहा था कि पाठ्य पुस्तकों के हर कार्टून की समीक्षा की जाएगी और अगले साल से इस तरह के कार्टून हटा लिए जाएँगे. उन्होंने बताया कि उस पुस्तक की बिक्री तुरंत प्रभाव से रोक दी गई है.

सिब्बल ने माना था कि कार्टून आपत्तिजनक है और कहा कि पाठ्य पुस्तकों में इस तरह के कार्टून को देखकर हटाने के बारे में एक समिति का गठन कर दिया गया है.

'दुर्भाग्यपूर्ण'

एनसीईआरटी के सलाहकार के पद से इस्तीफा देते हुए पलशिकर ने संसद के दोनों सदनों में हुए हंगामे को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया था.

उनका कहना था, " लोकतंत्र में बहस की गुंजाइश कम होती जा रही है." संस्था के एक अन्य सलाहकार योगेंद्र यादव भी इस विवाद के बाद इस्तीफा दे चुके हैं.

ये कार्टून जाने-माने कार्टूनिस्ट शंकर ने बनाया था जिसमें नेहरू को हाथ में एक चाबुक लिए हुए दिखाया गया है और वह एक घोंघे पर बैठे अंबेडकर का पीछा कर रहे हैं.

इस कार्टून में नेहरू अंबेडकर से संविधान पर काम में तेजी लाने के लिए कह रहे हैं. उस कार्टून के नीचे लिखा है कि संविधान बनने में तीन साल लगे तो संविधान सभा को इसका मसौदा तैयार करने में इतना समय क्यों लगा?

सांसदों का कहना था कि रिकॉर्ड समय में तैयार हुए संविधान को लेकर इस तरह की बात करना गलत है और उसे तुरंत हटाया जाना चाहिए. ये कार्टून लगभग छह दशक पहले बना था.

संबंधित समाचार