संसद की गरिमा बनाए रखने का संकल्प

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Image caption संसद के 60 साल पूरे होने पर विशेष सत्र

भारतीय संसद की पहली बैठक की 60वीं वर्षगाँठ के मौके पर संसद ने अपनी गरिमा, पवित्रता और सर्वोच्च स्थान बनाए रखने का संकल्प जाता है जिससे लोकतांत्रिक मूल्य और सिद्धांत मजबूत हो सकें.

लोकसभा और राज्य सभा के सदस्यों ने संसद की निगरानी में लोगों के प्रति सरकार की जवाबदेही और बढ़ाने पर बल दिया.

इस मौके पर दोनों सदनों की दिन भर बैठक चली जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और राज्य सभा के सभापति हामिद अंसारी ने ये प्रस्ताव रखा. सभी सदस्यों ने इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया.

दोनों सदनों के सदस्यों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान के साथ ही समानता, भाईचारे, न्याय, मानवता और दलितों तथा वंचितों के उत्थान को संविधान में जगह देने वाले पूर्वजों को याद किया.

सदस्यों ने भारत की जनता की परिपक्वता को संतोष और गर्व के साथ स्वीकार किया जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों को पूरे मन के साथ स्वीकार किया है.

इस अवसर पर विभिन्न दलों के सांसदों ने पिछले छह दशक के संसद के खट्टे-मीठे अनुभवों को याद किया और भावी चुनौतियों का मिलकर सामना करने का संकल्प भी दोहराया.

प्रधानमंत्री का गर्व

सुबह 11 बजे राज्यसभा में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चर्चा की शुरूआत करते हुए सबसे पहले सांसदों और देशवासियों को बधाई दी.

इस मौके पर मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले 21 वर्षों से राज्यसभा का सदस्य होने पर उन्हें गर्व है.

मनमोहन सिंह ने राज्यसभा की अहमियत को बताते हुए कहा कि इस सदन ने देश के सामने आने वाले कई अहम मुद्दों पर एक राष्ट्रीय सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई है.

उन्होंने कहा कि अब सबको मिलकर नया अध्याय लिखना है.

मनमोहन सिंह ने कहा कि दुनिया भर में भारत के बढ़ते कद की एक वजह भारतीयों का अटूट विश्वास है कि लोकतांत्रिक तरीकों से ही सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है.

मनमोहन सिंह का कहना था, ''भारत की जनता ने बार-बार संसदीय लोकतंत्र में अपना विश्वास जताया है. हाल के वर्षों में जनता ने अधिक से अधिक संख्या में वोट डालकर अपनी आवाज को और जोर से हम तक पहुंचाने ने कोशिश की है.''

मनमोहन सिंह ने एक तरफ जहां संसद की जमकर तारीफ की वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा कि संसदीय कार्रवाही के दौरान बार बार बाधा पहुंचाना चिंता का विषय है.

उन्होंने कहा कि सभी सांसदों के लिए ये जरूरी है कि वे लोकतंत्र की महान संस्थाओं का सम्मान करें और उस भावना का भी सम्मान करें जो एक चुने हुए प्रतिनिधि के आशा की जाती है.

विपक्ष

इधर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने संसद के पिछले 60 वर्षों के सफर को याद करते हुए कहा कि एक पथिक की तरह भारतीय संसद भी चलता, ठहरता, फिर चलता हुआ अपनी इस यात्रा को पूरी कर रहा है.

सुषमा स्वराज ने कहा कि इन 60 वर्षों में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक चिंतन में भी बदलाव आया है जिसका असर संसद में साफ दिखाई पड़ता है.

उनके अनुसार भारत के गांव सदन में प्रतिबिंबित होते हैं और इस समय लगभग 40 फीसदी सांसद ऐसे हैं जो खेती से जुड़े हुए हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसे कितने ही अवसर आए हैं जब पक्ष और विपक्ष की दीवार ढह गई और पूरा सदन एक देश के रूप में खड़ा हो गया.

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की कल्पना बिना संसद के नहीं की जा सकती है.

महिला आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि बहुत अफसोस की बात है कि इन 60 वर्षो में महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं बदला.

उन्होंने आशा जताई कि 15वी संसद में ही महिला प्रतिनिधित्व असंतुलन ख़त्म हो जाएगा.

सुषमा स्वराज ने संसद के सामने चुनौतियों और समस्याओं का भी जिक्र किया लेकिन कहा कि सारी विकृतियों का इलाज लोकतंत्र पर प्रहार नहीं बल्कि और अधिक लोकतंत्र है.

राज्यसभा में प्रधानमंत्री के बाद नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने अपने भाषण की शुरूआत करते हुए सबसे पहले वरिष्ठ सांसद रिशांग किशिंग को बधाई दी जो कि 1952 में होने वाली पहली बैठक में भी सदस्य के रूप में मौजूद थे और 60 साल बाद 2012 में भी सांसद के रूप में सदन में मौजूद है.

मील का पत्थर

लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि 1952 का साल भारत में प्रजातंत्र के लिए मील का पत्थर है.

प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि कई देशों में लोकतंत्र असफल रहा लेकिन भारत में लोकतंत्र की सफलता का सबसे बड़ा कारण रहा है विपरीत विचारधारा के लिए सहिष्णुता और आदर का भाव होना.

कांग्रेस की अध्यक्ष और केंद्र में सत्ताधारी यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा कि आम आदमी लोकतंत्र की आत्मा है और यही संसद आम आदमी की सबसे बड़ी ताकत है.

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह ने कहा कि आज देश के सामने गरीबी और बेरोजगारी की बड़ी समस्या है. उन्होंने कहा कि उन समस्याओं पर विचार करना चाहिए और सबको मिलकर संकल्प लेना चाहिए कि उन गरीबों और बेसहारा लोगों को कैसे आगे लाया जाए.

राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू यादव ने अन्ना हजारे का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग लोकपाल के नाम पर लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश रच रहें हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोक बड़ा है, तंत्र नहीं.

कम्युनिस्ट पार्टी के गुरूदास दासगुप्ता ने कहा कि इस मौके पर भारत की आम जनता को सबसे पहले धन्यवाद देना चाहिए क्योंकि इमरजेंसी के दौरान जब लोकतंत्र पर खतरा मंडरा रहा था तब आम लोगों ने ही इसकी रक्षा की थी.

राष्ट्रपति का संबोधन

संसद में चर्चा रविवार दिन भर जारी रही और शाम को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया.

इस मौके पर पहली लोकसभा के कुछ सदस्यों को सम्मानित भी किया गया जिनमें रिशांग कीशिंग और रेशम लाल जांगड़े भी शामिल थे.

91 वर्षीय रिशांग कीशिंग फिलहाल राज्य सभा सदस्य हैं और वे पहली और तीसरी लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं. जबकि जांगड़े पहली, दूसरी और नवीं लोकसभा के सदस्य थे.

इस मौके पर राष्ट्रपति पाटिल ने पांच रुपये और दस रुपये के विशेष सिक्के भी जारी किए. साथ ही तीन पुस्तकों का भी अनावरण हुआ.

इन सबके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए.

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