एयर इंडिया:पायलटों के तेवर कड़े, हड़ताल जारी

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Image caption एयर इंडिया में पिछले कई दिनों से पायलटों ने हड़ताल कर रखी है.

एयर इंडिया में पायलटों की हड़ताल अब भी जारी है और पायलटों ने हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद कड़ा रवैया अपनाए रखा है.

एयर इंडिया के इंडियन पायलट्स गिल्ड के संयुक्त सचिव यूनियन के कैप्टन तौसिफ मुकादम ने बीबीसी से बातचीत की और बताया कि हड़ताल के पीछे तात्कालिक कारण तो हैं ही लेकिन इसका मूल कारण दो कंपनियों का ठीक से विलय न हो पाना है.

तौसिफ का कहना था कि वो बातचीत करने के लिए तैयार हैं और यात्रियों को हो रही असुविधा के लिए खेद जताते हैं लेकिन प्रबंधन यात्री असुविधा की आड़ में पायलटों के करियर से खिलवाड़ नहीं कर सकता.

'बर्खास्त पायलट बहाल करें'

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी तीन मांगें हैं. हम बिना शर्त बातचीत के लिए भी तैयार हैं. बर्खास्त पायलटों को वापस लिया जाए. यूनियन बहाल की जाए ताकि बातचीत हो और आगे करियर की संभावनाएं बराबरी पर लाई जाएं.’’

तौसिफ का कहना था कि पूरी समस्या की जड़ इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया के विलय की प्रक्रिया ठीक से पूरी न हो पाना ही रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘ विलय की प्रक्रिया ठीक से हुई नहीं. अभी भी मानव संसाधन के मुद्दे वहीं के वहीं हैं. इंडियन एयरलाइंस के पायलट अलग हैं. एयर इंडिया के अलग. दोनों कंपनियों के जहाज़ भी अलग हैं और वो उन्हीं जहाज़ों को चलाते थे. पिछले दिनों बोईंग जहाज़ आए जो एयर इंडिया के पायलट चलाते थे. अब उन जहाज़ों पर इंडियन एयरलाइंस के पायलटों को ट्रेनिंग दी जा रही है जिसमें करोड़ो खर्च हो रहा है जबकि इसकी ट्रेनिंग एयर इंडिया वाले पायलटों को देने में कम खर्चा होगा.’’

मुद्दा साफ है कि इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया के विलय में एयर इंडिया के पायलटों को काफी नुकसान हो रहा है और शायद इसलिए हड़ताल में मूल रुप से एयर इंडिया के पायलट ही शामिल हैं.

तौसिफ इस बात की पुष्टि करते हैं और बताते हैं कि इसी कारण सिर्फ घरेलू उड़ानों में दिक्कतें हैं जबकि विदेश की उड़ानें बिल्कुल बाधित नहीं हुई हैं.

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