ऐतिहासिक जलमहल को पट्टे पर देना गलत: हाई कोर्ट

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Image caption याचिकाकर्ता का कहना है कि इस इमारत को पट्टे पर देना कानून और पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन है

राजस्थान में हाई कोर्ट ने जयपुर की एक धरोहर 'जल महल' को एक निजी संस्था को पट्टे पर देने को गलत ठहराया है.

राज्य सरकार ने वर्ष 2003 में इस इमारत को 99 वर्ष के लिए पट्टे पर दे दिया था. जलमहल को 16वीं सदी में बनाया गया था और फिर 18वीं सदी में इसके आसपास के इलाके का रख-रखाव की दृष्टि से विस्तार किया गया.

इसे कुछ स्थानीय नागरिकों ने चुनौती दी और मामले को अदालत में ले गए. अब हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार इस भवन और उससे जुड़े मान सागर झील इलाके का पुराना स्वरूप बहाल करे.

इस फैसले से राज्य सरकार को झटका लगा है, जो अपने कदम को सही बताती रही है.

उसका कहना था कि इस इमारत और झील को रख रखाव और विकास के लिए दिया गया है. उधर जल महल को पट्टे पर लेने वाली संस्था का कहना है कि वो कानूनी जानकारों से सलाह कर रही है और इस निर्णय पर अपील का विचार कर रही है.

कोई दो साल तक चले कानूनी विवाद के बाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश अरुण मिश्र और महेश भगवती की खंडपीठ ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया.

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Image caption मान सागर झील के बीचो बीच खड़े जल महल को राजपूत और मुगल वास्तु शैली का नमूना माना जाता है.

अदालत ने कहा कि मान सागर की जमीन और जुड़ी संपत्ति को किसी भी तरह पट्टे पर नहीं दिया जा सकता.

अदालत ने कहा कि जो भी निर्माण किया गया है, वो तुरंत हटाया जाए और उसे हटाने में आने वाला खर्चा भी उस कंपनी से लिया जाए जिसने उस पर निर्माण करवाया है.

कानून और पर्यावरण का उल्लंघन

अदालत ने कहा ऐसी संपत्ति जनता की है और उसे पट्टे पर देना बेचने के समान है. याचिकाकर्ता ने सरकार की मंशा और फैसले पर बहुत सारे सवाल खड़े किए और कहा जल महल को बहुत ही जल्दबाजी में पट्टे पर दिया गया.

याचिकाकर्ता भगवत गौर का कहना था कि इस इमारत को पट्टे पर देना कानून और पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन है.

उधर सरकार और पट्टे पर लेने वाली कंपनी ने तर्क दिया कि जल महल बहुत खराब हालत में था और उसे बेहतर ढंग से संरक्षित किया गया है.

प्रतिपक्षी का कहना था कि इस मामले में खुली निविदा के जरिए फैसला किया गया और इसमें 19 निविदादातो में से एक उचित के हक में फैसला किया गया. लेकिन इस दलील को गलत माना और सरकार के कदम को कानून सम्मत नहीं माना.

जयपुर शहर में आमेर के निकट मान सागर झील से मुखातिब जल महल दिन में माहौल से गोया खुद बतियाता सा नजर आता है और रात को ऐसा मंजर पेश करता है जैसे झील और जल महल हंस-हंस कर बात कर रहे हो.

इसमें विकसित तस्वीरों के संग्रहालय को देखने बड़ी तादाद में लोग आते है. इसके चमेली बाग में शास्त्रीय चित्रों का बसेरा है. राजपूत स्थापित्य शैली में बने इस चमेली बाग में ऐसी तस्वीरे बनी है जो वातावरण की मुद्राओ का प्रतिबिंब बनाती है.

ऐतिहासिक आमेर और जयपुर के बीच बनी मान सागर झील के बीचो बीच खड़े जल महल को राजपूत और मुगल वास्तु शैली का नमूना माना जाता है.

अठारवी सदी में जयपुर के तत्कालीन राजा सवाई जय सिंह ने इस झील का दायरा बढ़वाया और जल महल का रख-रखाव का काम भी करवाया.

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