राष्ट्रपति पद की दौड़ में पीए संगमा भी हुए शामिल

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पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हो गए हैं. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें समर्थन देने का वादा किया है.

संगमा ने कहा कि आज़ादी के बाद छह दशक बीत चुके हैं लेकिन आदिवासी समुदाय के किसी व्यक्ति को कभी देश का सर्वोच्च पद नहीं मिला जबकि अन्य समुदायों के लोगों को यह मौक़ा मिल चुका है.

उन्होंने कहा, ''मेरी मुलाक़ात चेन्नई में जयललिता जी से हुई है और नवीन पटनायक जी से भी मेरी बात हुई है, दोनों ने मुझे समर्थन देने का वादा किया है.''

दिलचस्प बात ये है कि उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने अब तक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम की घोषणा नहीं की है.

संगमा ने कहा, ''यह किसी एक पार्टी की बात नहीं है, अनेक पार्टियों के आदिवासी नेताओं ने मिलकर यह निर्णय लिया है. मैं अपनी पार्टी के नेता से शुक्रवार को मिल रहा हूँ तब इस मामले पर बात होगी.''

लोकसभा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रह चुके संगमा का कहना है कि उन्होंने मुख्य विपक्षी गठबंधन एनडीए के कई नेताओं से मुलाक़ात की है और वे जल्दी ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी से भी मिलने वाले हैं.

मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के समर्थन के बारे में पूछे जाने पर संगमा ने कहा, ''बीजेपी का कहना है कि वे आदिवासी राष्ट्रपति की माँग को जायज़ मानते हैं और आदिवासियों के मुद्दों से उनकी सहानुभूति है, अगले सप्ताह उनकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हो रही है जिसमें वे इस मामले पर विचार करके कोई निर्णय लेंगे.''

उनका कहना है कि कई पार्टियों के नेताओं का समर्थन उन्हें हासिल है लेकिन अभी तक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से इस बारे में कोई बात नहीं हुई, ''हमने सोनिया जी से मिलने का समय माँगा है.''

संगमा ने कहा कि अगले दो-तीन दिनों में तस्वीर साफ़ हो जाएगी. उन्होंने आशा प्रकट की कि उनके नाम पर सहमति बन सकेगी और उन्हें अन्य राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिलेगा.

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