जब चिदंबरम बोले भोजपुरी में

  • 18 मई 2012
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Image caption केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को संसद में भोजपुरी बोलकर सबको चौंका दिया

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम यूं तो तमिलनाडु के हैं और वो हिंदी भी कम ही बोलते हैं लेकिन गुरुवार को उन्होंने भोजपुरी में एक पंक्ति बोलकर सबको आश्चर्य में डाल दिया.

हुआ यूं की भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने को लेकर लोकसभा में एक प्रस्ताव के दौरान चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि वो भोजपुरी पर फैसला मानसून सत्र में करना चाहेंगे.

प्रस्ताव का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ हम रउवा सब के भावना समझतानी यानी.’’ इसका मतलब था वो इस मुद्दे पर सांसदों की भावनाएं समझते हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘ हम इस मामले में सीताकांत महापात्रा और यूपीएससी कमिटी की रिपोर्टों पर विचार करेंगे और इस बारे में मानसून सत्र में ही कोई घोषणा कर सकेंगे.’’

चिदंबरम का कहना था कि वो इस मामले में जल्दी ही कोई अच्छी ख़बर देना चाहते हैं.

भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मुद्दा कांग्रेस के सांसद जगदम्बिका पाल ने उठाया था ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के ज़रिए. इसे सपा के और राजद के सासंदों ने भी समर्थन दिया था.

पाल का कहना था कि इस मुद्दे पर सीताकांत महापात्र कमिटी की रिपोर्ट आए आठ साल हो गए हैं और अब इस पर जल्दी फैसला होना चाहिए.

इस मामले पर कई सांसदों के अड़ जाने के बाद केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में पार्टी के नेता प्रणब मुखर्जी से त्वरित बैठक की और उसके बाद जवाब दिया कि संसद के अगले सत्र में इस पर कोई फैसला ज़रुर कर लिया जाएगा.