भाजपा बैठक में मोदी के शामिल होने पर संशय

  • 20 मई 2012
नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption इसी साल चुनाव होने वाले हैं इसलिए मोदी भी अपनी नाराजगी एक सीमा से आगे नहीं ले जा सकते है.

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने पर संशय बरकरार है.

दूसरी तरफ कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने भी साफ कह दिया है कि वो पार्टी के कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं होंगे.

येदियुरप्पा इस बात से दुखी हैं कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व और राज्य के मुख्यमंत्री कथित रूप से उनकी अनदेखी कर रहे हैं.

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की ये दो दिवसीय बैठक 24 मई से मुंबई में होने वाली है जिसमें पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता शामिल होंगे लेकिन नरेंद्र मोदी उस बैठक में शामिल होंगे या नहीं इस बारे में स्थिति साफ नहीं है.

दिल्ली में पार्टी के नेता इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं.

बीबीसी ने पार्टी प्रवक्ता से बात करने की कोशिश की लेकिन उनमें से किसी से संपर्क नहीं हो सका.

लेकिन दूसरे समाचार माध्यमों में इस बारे में चल रही खबरों के मुताबिक पार्टी के प्रवक्ता यही कह रहें हैं कि पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल होंगे.

नरेंद्र मोदी के बारे में खासतौर पर पूछे जाने पर भी वे केवल यही कह रहे हैं कि पार्टी में किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है और सभी लोग कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेगे.

मनाने की कोशिश

अहमदाबाद स्थित टाइम्स ऑफ़ इंडिया के रेजीडेंट संपादक अजय उमठ ने बीबीसी से बातचीत के दौरान इस बारे में और जानकारी देते हुए कहा, ''शुरू में नरेंद्र मोदी ने कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेने से साफ इनकार कर दिया था लेकिन उसके बाद राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के एक बड़े पदाधिकारी और पार्टी के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली नरेंद्र मोदी को समझाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि एक तरफ येदियुरप्पा, दूसरी तरफ वसुंधरा राजे और तीसरी तरफ नरेंद्र मोदी ये तीन बड़े नेता अगर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उपस्थित नहीं रहेंगे तो पार्टी की बहुत किरकिरी होगी.''

अजय उमठ के अनुसार भाजपा के महासचिव संजय जोशी, पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को अचानक मिल रही तवज्जो को लेकर नरेंद्र मोदी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं.

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी ने हाल में हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों में भी पार्टी की तरफ से चुनाव प्रचार नहीं किया था.

तीन साल के बाद केशुभाई पटेल को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बुलाया गया है और अजय उमठ के अनुसार पार्टी के दो राष्ट्रीय महासचिवों ने उन्हें फोन करके बैठक में शामिल होने के लिए कहा है.

यहां ये बात भी अहम है कि मोदी और केशुभाई पटेल एक दूसरे के पुराने विरोधी रहे हैं. केशुभाई को हटाकर ही 2001 में नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री बनाया गया था.

हाल ही में केशुभाई ने मोदी को निशाना बनाते हुए बयान दिया था कि गुजरात में इमरजेंसी जैसा भय का माहौल है और गांधीनगर में ठग और लुटेरे लोग बैठे हुए हैं, गुजरात में कानून-व्यवस्था की हालत चर्मरा गई है.

लेकिन भाजपा की सियासत पर खास नजर रखने वाले इंडियन एक्सप्रेस अखबार के विशेष संवाददाता प्रदीप कौशल का मानना है कि मोदी मुंबई की बैठक में जरूर शामिल होंगे.

'मोदी की मजबूरी'

प्रदीप कौशल कहते हैं, ''नरेंद्र मोदी बेहद सजग और बड़े व्यावहारिक नेता हैं और एक व्यावहारिक नेता को पता होता है कि आप विरोध कितना खींच सकते हैं. गुजरात में चुनाव होने वाले हैं इसलिए मुझे नहीं लगता कि मोदी अब इसे विषय को ज्यादा खींचेंगे. क्योंकि आखिरकार पार्टी व्यक्ति से बड़ी होती है.''

वैसे तो राष्ट्रीय कार्कारिणी की बैठक में आर्थिक, राजनैतिक प्रस्ताव आते हैं, देश के विभिन्न समस्याओं पर पार्टी का नजरिया पेश किया जाता है लेकिन इस बार मौजूदा अध्यक्ष नितिन गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनाने पर भी विचार हो सकता है.

राष्ट्रीय कार्यकारिणी गडकरी को तीन साल का दूसरा कार्यकाल दिए जाने की राष्ट्रीय परिषद से सिफारिश कर सकती है क्योंकि परिषद ही संविधान बदलने के लिए अधिकृत है.

भाजपा के संविधान के अनुसार पार्टी के अध्यक्ष को लगातार दो बार कार्यकाल नहीं सौंपा जा सकता है उनमें अंतर आना जरूरी है. लेकिन राष्ट्रीय परिषद चाहे तो संविधान में संशोधन कर गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनाने पर विचार कर सकती है.

लेकिन प्रदीप कौशल कहते हैं कि पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि कांग्रेस के गिरते ग्राफ का राजनैतिक लाभ कैसे लिया जाए.

उनके अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से अलग येदियुरप्पा, वसुंधरा और मोदी से जुड़े सवालों के अलावा इन गंभीर विषयों पर भी चर्चा हो सकती है.

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