लोकपाल बिल अब सेलेक्ट कमेटी के पास

  • 21 मई 2012
लोकपाल बिल इमेज कॉपीरइट AP
Image caption राज्य सभा में भारी हंगामे के बाद लोकपाल बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया.

लोकपाल बिल एक बार फिर राज्य सभा में पास नहीं हो सका और उसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया है.

तमाम पार्टियों ने ध्वनि मत से इस पास कर दिया है, लेकिन ये सब कुछ भारी हंगामे के बाद हुआ.

सेलेक्ट कमेटी अगले तीन महीनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.

सरकार की तरफ से संसदीय कार्यमंत्री वी नारायणसामी ने सोमवार की शाम लोकपाल बिल राज्य सभा में पेश किया लेकिन एक सांसद नरेश अग्रवाल ने उसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव रखा.

प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने का विरोध किया.

भारतीय जनता पार्टी के सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि किसी बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने का प्रस्ताव केवल बिल के इंचार्ज यानी कि इस मामले में संसदीय कार्यमंत्री ही कर सकते हैं कोई और दूसरा सदस्य नहीं.

लेकिन सत्ताधारी पक्ष इसको मानने के लिए तैयार नहीं था.

हंगामा

इसको लेकर सदन में हंगामा शुरू हो गया.

राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने कहा कि पिछले लगभग 40 साल से किसी ना किसी रूप में लोकपाल बिल पेश किया जाता रहा है लेकिन कोई ना कोई बहाना करके इसे पास नहीं किया जाता है.

जेटली ने कहा कि सारे देश की निगाहें संसद पर टिकी हुई हैं. उनके मुताबिक पिछले साल दिसंबर 2011 में लगा था कि लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा में भी बिल पास हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

जेटली के अनुसार उस समय सरकार का ये आरोप बिल्कुल बेबुनियाद था कि सदन में ढेर सारे संशोधन पेश किए गए थे.

जेटली ने आरोप लगाया कि दरअसल सरकार लोकपाल बिल पास करने के लिए गंभीर है ही नहीं.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार किसी भी बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के लिए स्वतंत्र है लेकिन उसका तरीका सही होना चाहिए.

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि वो दूसरे के कंधे पर बंदूक रख कर चलाना चाहती है.

उन्होंने कहा कि सरकार को ये जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि वो लोकपाल बिल को पास नहीं करवा सकी और उसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेज रही है. आखिरकार संसदीय कार्यमंत्री नारायणसामी ने इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव रखा जिसे ध्वनि मत से पास कर दिया गया.

'नीयत स्पष्ट नहीं'

अन्ना हज़ारे ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार की नीयत साफ नहीं है और वो केवल खानापूर्ति कर रही है.

वहीं योग गुरू रामदेव ने कहा कि सरकार लोकपाल के प्रति कभी भी गंभीर नहीं रही है.

टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने 25 जुलाई से अनशन करने का फैसला किया है.

गौरतलब है कि पिछले साल यानी 2011 में संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में लोकपाल बिल पारित होने के बाद राज्यसभा में भेजा गया था लेकिन राज्यसभा में बिल पारित नहीं हो सका था.

राज्यसभा में सरकार अल्पमत में है और सरकार और विपक्ष में कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई थी.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार