भोपाल गैस त्रासदी का कचरा जर्मनी भेजने पर विचार

  • 25 मई 2012
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Image caption डाउ केमिकल के खिलाफ दुनियाभर में विरोध आयोजित होते रहे हैं.

भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड संयंत्र में जमा कचरे को नष्ट करने के लिए, उसे जर्मनी भेजने की एक योजना पर विचार हो रहा है.

इसी संयंत्र में वर्ष 1984 में जहरीली गैस का रिसाव हुआ था जिसकी वजह से हजारों लोग मारे गए थे.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक, यूनियन कार्बाइड संयंत्र में वर्ष 1969 से वर्ष 1984 के बीच 350 मीट्रिक टन रासायनिक कचरा गढ्ढों में दबाया गया.

आशंका जताई जा रही है कि इससे भूमिगत जल जहरीला हो रहा है.

रासायनिक कचरे के निपटारे के लिए जर्मनी की 'गिज' नामक कंपनी से बात हो रही है. दोनों पक्षों के बीच इस बारे में अभी कोई करार नहीं हुआ है.

कंपनी का कहना है कि भारतीय अधिकारियों ने इस संबंध में जर्मनी से अनुरोध किया था.

कैसे होगा कचरे का निपटारा

इस विमर्श से जुड़े लोगों का कहना है कि रासायनिक कचरे को नष्ट करने के बदले जर्मनी को नब्बे लाख यूरो के भुगतान का प्रस्ताव है.

भारत इस रकम की भरपाई डाउ कैमिकल से करवाने की कोशिश करेगा जिसने ये संयंत्र यूनियन कार्बाइड से वर्ष 2001 में खरीद लिया था.

एपी समाचार एजंसी के मुताबिक भोपाल के गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाली रचना ढींगरा का कहना है, ''भारत के पास कचरे को सुरक्षित तरीके से ठिकाने लगाने की व्यवस्था नहीं है.''

गैस पीड़ितों को जो मुआवजा दिया गया है, उसे वो नाकाफी बताते हैं और उसे बढ़ाने की मांग करते रहे हैं.

ये लोग डाउ कैमिकल को लंदन ओलंपिक का प्रायोजक बनाने का भी विरोध कर रहे हैं. लेकिन आयोजकों का कहना है कि वे डाउ को प्रायोजक की भूमिका में बरकरार रखेंगे.

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