नरेंद्र मोदी का केंद्र सरकार पर हमला

  • 26 मई 2012
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Image caption नरेंद्र मोदी की नजर अब केंद्र की राजनीति पर

मुम्बई में एक रैली को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने यूपीए सरकार पर जबरदस्त हमला बोलते हुए कहा है कि इस सरकार को एक क्षण के लिए भी सत्ता में रहने का हक नहीं है.

सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक यह सरकार सत्ता में है उनके किसी भी सपने के पूरे होने की उम्मीद उन्हें नहीं दिखाई देती.

उनका आरोप था कि दिल्ली की सरकार के पास न तो नेता है, न ही नीति और साफ नियत है.

मनमोहन सिंह सरकार की तुलना निर्मल बाबा से करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हीं की तरह यूपीए सरकार ने भी कहा था कि वह सौ दिनों के अंदर मँहगाई खत्म कर देंगे. निर्मल बाबा पर तो कई केस चल रहे हैं, वह भी केंद्र सरकार के खिलाफ केस लेकर जनता के दरबार में आए हैं.

हर समस्या के लिए गठबंधन क्यों जिम्मेदार

उन्होंने सरकार से प्रश्न किया कि यूपीए के रिपोर्ट कार्ड में कुपोषण के खिलाफ उठाए गए कदमों का जिक्र क्यों नहीं है.प्रधान मंत्री का मजाक उड़ाते हुए उन्होंने कहा कि वह हर समस्या के लिए गठबंधन को जिम्मेदार ठहराते हैं. लेकिन जब उनके विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र संघ में जब दूसरे देश के नेता का भाषण पढ़ दिया तो क्या इसके लिए भी गठबंधन की मजबूरी थी.

उन्होंने सवाल पूछा कि प्रधान मंत्री और रक्षा मंत्री तो एक ही पार्टी से हैं लेकिन सरकार सेना के खिलाफ मोर्चा क्यों खोले हुए है. यह किस तरह की मजबूरी है ?

रुपए के गिरते मूल्य पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने पूछा कि दूसरे पड़ोसी देशों की मुद्रा क्यों इस तरह से नहीं गिर रही है.

राष्ट्रीय स्तर पर आने की मंशा

बिजली की कमी का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या वजह है कि कांग्रेस प्रशासित प्रदेशों में 16 से 17 घंटों की बिजली की कटौती हो रही है जबकि बीजेपी प्रशासित प्रदेशों में बिजली का कोई संकट नहीं है.

मोदी के तेवर कुछ इस तरह के थे मानो वह राष्ट्रीय स्तर पर आने की अपनी मंशा को जग जाहिर कर रहे हों. अपने भाषण में जयललिता का जिक्र कर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि नए गठबंधन बनाने से उन्हें कोई गुरेज नहीं होगा.

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