भोपाल गैसकांड: यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे पर केंद्र को फटकार

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Image caption भोपाल गैस पीड़ितों का कहना है कि उनके साथ अब तक न्याय नहीं हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल में 28 साल से बंद पड़े यूनियन कार्बाइड के संयंत्र में मौजूद जहरीले कचरे के निपटारे को लेकर गंभीरता न दिखाने के लिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई है.

अदालत ने कहा है कि फिलहाल डाऊ केमिकल्स के स्वामित्व वाले इस संयंत्र को लेकर सरकार जल्द अंतिम फैसला ले.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने कहा, “28 साल बाद भी आप नहीं जानते कि क्या करना है. ऐसा इसलिए हैं क्योंकि जो लोग भोपाल में प्रभावित हुए और वहां रह रहे हैं, वे गरीब हैं. इस मामले से निपटने में ये आपकी नाकामी है.”

अदालत ने कहा कि इस समस्या से निपटने को लेकर गंभीरता का अभाव रहा है. केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया है कि वो जून के अंत तक इस बारे में कोई फैसला करे.

सख्त टिप्पणियाँ

1984 में भोपाल में यूनियन कार्बाइड के संयंत्र से जहरीली गैस रिसने के बाद से ही जहरीला कचरा वहां पड़ा हुआ है. दुनिया की इस सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी में लगभग 15 हजार लोग मारे गए और हजारों घायल हो गए.

सरकार के निर्णय में किसी तरह का दखल से देने से बचते हुए खंडपीठ ने कहा कि सरकार सार्वजनिक हित को ध्यान में रखे.

खंडपीठ ने कहा, “अदालत कभी सरकार नहीं चलाना चाहती और न ऐसा उसे करना चाहिए. ये हमारा काम नहीं है. अगर मीडिया ने इसे पर्यावरण के मुद्दे के तौर पर लगातार उठाया होता तो आज तस्वीर कुछ और होती.”

अदालत ने 11 मई को मध्य प्रदेश के धार जिले में पिथमपुर कचरा निपटान केंद्र में पड़े जहरीले कचरे के निपटारे के आदेश पर अमल को रोक दिया. मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न गैर सरकारी संगठनों की तरफ से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अपने चार अप्रैल के निर्देश को लागू करने से रोक लिया था.

सोमवार को जब इस मामले पर सुनवाई हुई तो सरकार ने कहा कि वो जल्द ही इस बारे में फैसला लेगी और इसके लिए आठ जून को मंत्रियों के समूह की बैठक होगी.

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