सू ची को जल्द ही भारत आने की उम्मीद

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Image caption प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तीन दिनों की बर्मा यात्रा पर है.

तीन दिवस के बर्मा दौरे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची से मुलाकात की है.

पिछले ढाई दशकों में पहली बार है जब भारत का कोई प्रधानमंत्री बर्मा के दौरे पर है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सू ची को भारत में जवाहरलाल नेहरू भाषण देने का न्योता दिया है. सू ची ने कहा है कि वो जल्द ही भारत आएंगी.

मुलाकात के बाद मनमोहन सिंह ने कहा, "मेरे लिए ये बहुत सम्मान की बात है कि मुझे सुश्री सू ची से मिलने का मौका मिला है. सूची और उनके परिवार के साथ भारत के संबंधों को लेकर भी हम गर्व महसूस करते हैं. मैं उम्मीद करता हूं कि वो समय निकाल कर जल्द ही भारत आएंगी."

उन्होंने आगे कहा, "सू ची के जीवन और उनके संघर्ष और दृढ़ निश्चय से पूरे विश्व में लाखों लोगों को प्रेरणा मिलती है."

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सू ची बर्मा में राष्ट्रपति थेन सेन द्वारा शुरु की गई लोकतंत्र सुधार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगी.

सू ची ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वो प्रधानमंत्री के न्योते को स्वीकार कर सकेंगी. उन्होंने कहा, "मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रही हूं कि मुझे जवाहरलाल मेमोरियल लेक्चर के लिए न्योता मिला है. मुझे उम्मीद है कि मैं जल्द ही ये न्योता स्वीकार कर संकूंगी."

उन्होंने कहा कि भारत के साथ उनके परिवार के करीबी संबंध रहे हैं और उन्हें जवाहरलाल नेहरू को पंडितजी कहना सिखाया गया था.

सू ची ने कहा, "हमें एक दूसरे से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है. साथ ही हम इस क्षेत्र में शांति और स्थाईत्व बनाने में योगदान दे सकते हैं क्योंकि हमारे लोकतांत्रिक उद्देश्य शांति और स्थाईत्व पर ही निर्भर हैं."

करीबी संबंध

सू ची ने कहा की भारत और बर्मा के बीच संबंध मजबूत है, न सिर्फ इसलिए क्योंकि दोनों देशों की सीमाएं मिलती हैं बल्कि इसलिए भी क्योंकि दोनों देशों के नागरिकों के बीच भी करीबी रिश्ता है.

आंग सान सू ची की मां साठ के दशक में भारत में बर्मा की राजदूत रही थीं.

सू ची ने कॉलेज की पढ़ाई भी भारत से ही पूरी की थी. भारत सू ची के लोकतंत्र के आंदोलन का समर्थक रहा था लेकिन 90 के दशक के मध्य में भारत ने वहां की सैन्य शासन को समर्थन देना शुरु कर दिया था.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मंगलवार सुबह राजधानी नेपिडाव से रंगून पंहुचे.

इससे पहले सोमवार प्रधानमंत्री ने बर्मा के राष्ट्रपति थेन सेन से मुलाकात की थी. दोनों देशों ने सुरक्षा. आर्थिक सहयोग और सीमा-विकास से संबंधित 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए.

सू ची की विदेश यात्रा

बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची लगभग 25 सालों में पहली बार कोई विदेशी दौरा करेंगी.

वो थाईलैंड में होने वाली वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम में हिस्सा लेंगी.

लगभग दो दशकों तक सू ची ने बर्मा छोड़ने से इंकार किया क्योंकि उन्हें डर था कि सेना के अधिकारी उन्हें देश में वापस नहीं लौटने देंगे.

जब इंग्लैंड में उनके पति की कैंसर से मौत हो रही थी तब भी सू ची ने बर्मा छोड़ने से मना कर दिया था.

उनका ये आनेवाला विदेशी दौरा ये जताता है कि सेना समर्थित सरकार पर सू ची का भरोसा बढ़ा है.

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