ओडिशा में नवीन पटनायक के खिलाफ बगावत?

नवीन पटनायक
Image caption नवीन पटनायक इस समय ब्रिटेन के दौरे पर हैं

ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल में पिछले कुछ दिनों से चला आ रहा अंतर्विरोध उस समय बाहर आ गया, जब नवीन पटनायक मंत्रिमंडल के चार सदस्य सहित लगभग 25 विधायकों ने पार्टी के दूसरे केंद्र माने जाने वाले राज्य सभा सदस्य प्यारी मोहन महापात्र के घर पर लंबी बैठक की.

बैठक में किस बात पर चर्चा हुई, इस बारे में अभी कोई भी विधायक मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं है. लेकिन उनके इस बात को मानने वाला भी कोई नहीं है कि बैठक में वुधवार को बीजद की ओर से बुलाए गए ओडिशा बंद को सफल बनाने के बारे में चर्चा हुई.

यह प्रकरण ऐसे समय शुरू हुआ है, जब मुख्यमंत्री और पार्टी के अध्यक्ष नवीन पटनायक अपनी पहली विदेश यात्रा पर ब्रिटेन गए हुए हैं.

महापात्र के घर पर बैठक की खबर फैलने के कुछ देर बाद नवीन समर्थकों का उनके निवास पर आने का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक चलता रहा. वित्त मंत्री प्रफुल्ला घड़ाई, जंगल मंत्री देबी मिश्र सहित पटनायक सरकार के कई मंत्री और बीजद विधायकों के बीच जारी लंबी बातचीत का ब्यौरा अभी नहीं मिल पाया है.

कड़वाहट

नवीन पटनायक और कभी उनके काफी करीब रहे महापात्र के बीच संबधों में तनाव की बात को खुद महापात्र भी परोक्ष रूप से स्वीकार कर चुके हैं.

पिछले हफ्ते दिल्ली से वापसी पर नवीन पटनायक के साथ उनके संबंध में कड़वाहट के बारे में उन्होंने कहा था कि 'उम्र बढ़ने के साथ साथ रोमांस कुछ ठंडा पड़ ही जाता है. इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है.'

पिछले पंचायत चुनाव के बाद से ही नवीन पटनायक ने पार्टी और सरकार में प्यारी और उनके समर्थकों के वर्चस्व को निरस्त करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रक्रिया शुरू की है. लेकिन पार्टी में इस बागवत का इल्म शायद उन्हें भी नहीं था.

अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्यारी समर्थक अपने बगावत को केवल शक्ति प्रदर्शन तक ही सीमित रखेंगे या इससे आगे चलकर नवीन पटनायक को बेदखल कर सरकार बनाने की कोशिश करेंगे.

वैसे अनौपचारिक रूप से महापात्र खेमा 60 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है. राज्य विधानसभा में बीजद के कुल 104 विधायक हैं.

ये चर्चा जोरों पर है कि राज्य की राजनीति में इस उथल पुथल के मद्देनजर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक अपना इंग्लैंड का दौरा अधूरा छोड़ कर वापस आ सकते हैं. एक जून को नई दिल्ली पहुँचने के बाद तीन जून को वे भुवनेश्वर वापस आने वाले थे.

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