एनडी तिवारी के खून का नमूना लिया गया

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Image caption नारायण दत्त तिवारी के खून का सैंपल ले लिया गया है

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर आखिर वरिष्ठ कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी के खून का नमूना ले लिया गया है.

देहरादून में एनडी तिवारी के निवास 'अनंत वन' में एक जिला जज की उपस्थिति में डॉक्टरों ने उनके खून का नमूना लिया है.

खून का नमूना इसलिए लिया गया है ताकि इससे रोहित शेखर और उनकी माँ उज्जवला के डीएनए से एनडी तिवारी के डीएनए से मिलाया जा सके.

रोहित शेखर वह युवक है जिसने अदालत में मुकदमा दायर करके ये दावा किया है कि एनडी तिवारी उनके जैविक पिता हैं.

तिवारी इस दावे का खंडन करते हैं लेकिन वे खून का नमूना देने से लगातार कतराते रहे हैं.

अधिकारियों का कहना है कि अब जल्दी ही रोहित शेखर के पितृत्व के दावे का हल निकल सकेगा.

कड़ा पहरा

मंगलवार को सुबह से ही देहरादून में तिवारी के सरकारी आवास ‘अनंत वन’ पर पुलिसकर्मियों का पहरा था.

बाहर मीडियाकर्मियों की भीड़ थी लेकिन 'अनंत वन’ के अंदर सन्नाटा था और यहां तक कि तिवारी का निजी स्टाफ भी शक्ल दिखाने से कतरा रहा था.

देहरादून की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरू गर्ग के अनुसार, “सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे ताकि अदालत आदेश के पालन में कोई अड़चन न आए.”

अधिकारियों के अनुसार खून का नमूना देहरादून के जिला जज की उपस्थिति में लिया गया. दून अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर बीसी पाठक और पैथॉलॉजिस्ट डॉ एनके मिश्रा ने ये प्रक्रिया पूरी की.

डॉक्टर पाठक ने ही मीडिया कर्मियों से इस बात की पुष्टि भी की है.

रोहित और उज्जवला भी पहुँचे

पितृत्व विवाद के मामले में रोहित शेखर का दावा है कि उनकी मां उज्जवला और तिवारी में अंतरंग संबंध थे और वो तिवारी की जैविक संतान हैं.

तिवारी इससे इनकार करते रहे हैं. लेकिन वे डीएनए जांच के लिये भी आसानी से तैयार नहीं हुए और उन्होंने कानूनी दांव-पेंच का सहारा लेकर हर संभव कोशिश की कि उन्हें खून का नमूना न देना पड़े.

लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस की सहायता से तिवारी के खून का नमूना लेने का आदेश दे दिया और उसके बाद तिवारी के पास कोई चारा नहीं बचा.

मंगलवार इस मामले में उस वक्त नाटकीय मोड़ आ गया जब फिल्मी अंदाज में रोहित और उनकी मां भी तिवारी के आवास पर पंहुचे.

रोहित तो घर के अंदर चले गये, लेकिन उनकी मां को पहले तो रोक दिया गया फिर उन्हें भी अंदर जाने दिया गया.

इसके पहले मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उज्जवला ने कहा, “मुझे कानून और अदालत पर पूरा भरोसा है और जिस तेजी से इस मामले की सुनवाई हो रही है, जल्दी ही सबकुछ ठीक हो जाएगा.”

बड़े नेता रहे हैं तिवारी

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नारायण दत्त तिवारी उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रहने के अलावा केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे हैं.

एक जमाने में गांधी-नेहरू परिवार के बेहद करीबी माने जाते थे. लेकिन आज कांग्रेस ने उनसे लगभग किनारा कर लिया है. कांग्रेस का कोई भी नेता इस प्रकरण पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है.

तिवारी उम्र के 88 बसंत पूरे कर चुके हैं और बड़ी मुश्किल से चल–फिर पाते हैं.

लेकिन पितृत्व मामले में वो जिस कदर घिर चुके हैं उससे ऐसा लगता है कि उनकी वसीयत और विरासत के बारे में एक नया अध्याय लिखा जा सकता है.

तिवारी की पत्नी सुशीला का स्वर्गवास हो चुका है और उनके परिवार में उनका भतीजा प्रमुख है. माना जाता है कि उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए अंदरखाने उनकी संपत्ति पर अधिकार का विवाद भी चल रहा है.

इसी कड़ी में पिछले दिनों उनके भतीजे मनीष तिवारी और तिवारी के लंबे समय से विश्वासपात्र रहे उनके निजी सहायक संजय जोशी के बीच मारपीट हुई और आखिरकार पुलिस में रिपोर्ट लिखाने के बाद संजय जोशी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

आजकल स्थिति ये है कि उनके भतीजे की अनुमति के बिना तिवारी से कोई भी मुलाकात नहीं हो सकती.

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