'बिहार के आकड़े विकास नहीं दर्शाते'

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Image caption बिहार में आम लोगों का विकास कम ही हुआ है

बिहार में विकास दर इस वर्ष 13.13 प्रतिशत है जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है लेकिन क्या ये आकड़े सही तस्वीर पेश करते हैं.

बीबीसी संवाददाता सुशील झा ने इसी मुद्दे पर बात की जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के पूर्व प्रोफेसर ईश्वरी प्रसाद से.

इन आकड़ों को कैसे देखा जाना चाहिए.

इन आकड़ों को सतर्कता से देखना चाहिए क्योंकि ये ज़रुरी नहीं कि ये विकास दर बिहार का सही विकास दिखा रहे हों. 13 प्रतिशत का तो मतलब लगता है कि विकास हुआ है लेकिन विकास इसी से पता चलता है कि क्या लोगों का विकास हुआ है अगर नहीं तो फिर विकास का कोई अर्थ नहीं होता.

तो क्या ये संभव है कि लोगों का विकास न हो और विकास की दर ऊंची दिखे

देखिए, बिहार में ऐसा ही हुआ है कि दर ऊंची है लेकिन लोगों को फायदा नहीं हुआ. नीतीश कुमार के शासनकाल में क़ानून व्यवस्था ठीक हुई है जिसका असर हुआ है. क़ानून व्यवस्था ज़रुरी है अर्थव्यवस्था के लिए. सरकारी सहायता अधिक मिली है केंद्र सरकार से पहले की अपेक्षा. इसके अलावा सड़कें बनी हैं व्यापक पैमाने पर तो आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं. इन चीज़ों को जोड़ा जाए तो एक विकास कहा जा सकता है.

तो फिर क्या विकास नहीं हुआ.

आधारभूत संरचना में कोई बदलाव नहीं हुए हैं. बिहार में नब्बे प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर करते हैं. कृषि के लिए कुछ नहीं हुआ है. रोजगार के अवसर नहीं बढ़े. किसान आज भी परेशान. मज़दूर पलायन कर रहे हैं. ये वो क्षेत्र हैं जो लंबे समय में विकास की दिशा तय करते हैं. शहरों में विकास हुआ है. गांवों से लोग शहर आ रहे हैं. ब्लैक मार्केटिंग बढ़ी है. इसी कारण आम जनता को फायदा नहीं होने के बावजूद आकड़े बढ़े हुए दिखते हैं. ये गलत किस्म का विकास है.

बिहार सरकार की आलोचना इस बात को लेकर होती है कि कारखाने नहीं बने.

बिल्कुल यही मैं कररहा हूं. कृषि का विकास नहीं होगा. कारखाने नहीं बनेंगे तो विकास कैसे होगा. कोई नया बिजनेस नहीं आया है. कोई नया निवेश नहीं हुआ है. तो रोज़गार नहीं बढ़ा. बस बात ये है कि मीडिया में ये बातें नहीं आईं. मीडिया प्रबंधन अच्छा रहा है नीतीश सरकार का. बिहार सरकार ने कुछ चुनिंदा अर्थशास्त्रियों को बुलाया जो इनकी तारीफ करते हैं जिससे इनकी छवि बनती है.

बिहार में पंद्रह साल विकास नहीं हुआ उसके बाद नई सरकार पांच साल चली और बढ़ी तो विकास कैसे हुआ.

देखिए पंद्रह साल विकास एकदम नहीं हुआ. बेस नीचे था. वहां से विकास हुआ तो थोड़ा भी होगा तो अधिक लगेगा न. ये तो बेसिक स्टैटिस्टिक्स है. ये सब जानते हैं. इसके लिए अर्थशास्त्री होने की ज़रुरत है. जो विकास हो रहा है उसका असर दस साल नहीं रहेगा. लंबी अवधि वाले कोई कार्य नहीं हो रहे हैं.

लेकिन फिर लोग बिहार सरकार की तारीफ करते हैं और कहते हैं कि विकास हो रहा है.

आम जनता से मिलिए जाकर आप. जो मोबाइल जनता है. शहर की जनता है. जो बिहार से बाहर रहते हैं वो ऐसा प्रचार करते हैं. आप जाकर गांवों में लोगों से बात कीजिए उनके लिए क्या हुआ है. पलायन अभी भी जारी है. कृषि की कोई नीति नहीं हैं. उद्योग नहीं है. सर्विस सेक्टर में भी कुछ नहीं हुआ तो फिर मानव संसाधन का इस्तेमाल नहीं हुआ. ये आगे के लिए नुकसानदेह है बिहार के लिए.

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