क्या आधार योजना भारत में बड़ा बदलाव ला सकेगी?

आधार योजना
Image caption सरकार का दावा है कि आधार योजना के जरिए प्रशासन में एक बड़ा बदलाव होगा.

भारत की जनता के लिए यूआईडी या विशिष्ठ पहचान संख्या यानी आधार कार्ड का आखिर मतलब क्या है ?

बायोमेट्रिक डेटाबेस के जरिए लोगों की पहचान आम तौर पर सुरक्षा कारणों से की जाती है लेकिन आधार कार्ड का मुख्य उद्देश्य देश के गरीबों तक सरकारी सेवाओं का लाभ पहुंचाना है.

दुनिया भर में यूआईडी परियोजना का अत्यधिक खर्चीले होने और लोगों के निजी जीवन में कथित हस्तक्षेप के कारण विरोध होता रहा है, लकिन भारत में इन मुद्दों पर कोई खास बहस नहीं होती है.

इस योजना के तहत भारत में हर व्यक्ति पर केवल 88 रूपए खर्च होते हैं और पिछले साल बजट में सरकार ने इस परियोजना के लिए केवल 26 करोड़ 30 लाख डॉलर दिए थे जो कि भारत में दी जाने वाली खाद्य सब्सिडि का केवल दो फीसदी था.

निजी जीवन में दखलंदाजी के मुद्दे पर अधिकारी कुछ साफ नहीं बोलते हैं और कई विश्लेषकों और संसदीय रिपोर्टों ने इस बात पर चिंता जताई है कि भारत में अभी तक ऐसा कोई कानून नहीं है जो आपके निजी जीवन से जुड़े आंकड़ों की सुरक्षा कर सके.

सीमाएं

भारत में आधार परियोजना को लेकर ज्यादातर इस मुद्दे पर बहस होती है कि क्या इससे गरीबों की सचमुच में मदद होगी या नहीं.

अब जबके लोगों के आधार कार्ड बनकर तैयार होने लगे हैं तो इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष दोनों लोगों की राय खुलकर सामने आने लगी है.

भारत में चूंकि लोगों की आय को निर्धारित करना मुश्किल है इसलिए सरकार अपनी किसी भी योजना के लिए गरीबी रेखा इस आधार पर तय करती है कि लोगों के पास क्या-क्या सामान हैं, उनके घर किस तरह के हैं और उन्होंने कहां तक शिक्षा हासिल की है.

सरकार की ज्यादातर कल्याणकारी योजनाएं इन्हीं गरीब लोगों के लिए बनाई जाती है लेकिन सरकार के अपने ही सर्वेक्षण बताते हैं कि ज्य़ादातर गरीब सरकारी योजना का फायदा नहीं उठा पाते और अधिक समृद्ध लोग सरकारी योजना का लाभ लेते हैं.

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Image caption नेरगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को भी इस योजना से लाभ होगा.

आधार कार्ड के जरिए हालाकि इस तरह की गड़बड़ियों का तो सुधार नहीं हो सकता लेकिन इतना जरूर है कि आधार कार्ड के जरिए ये तय किया जा सकता है कि योजना का लाभ किसे मिल रहा है.

कुछ ऐसे समीक्षक भी हैं जिनका मानना है कि यूआईडी के जरिए सरकार सभी कल्याणकारी योजनाओं के तहत इसके हकदार लोगों को सीधे नकद देने की योजना बना रही है.

जमीनी अनुभव से पता चलता है कि आधार योजना मौजूदा प्रणाली में होने वाली गड़बड़ियों को खत्म तो नहीं कर सकती है हां लेकिन उसमें थोड़ी सुधार कर सकती है.

लेकिन अगर योजना का लाभ उठाने वाले गरीब लोग और इससे जुड़े सरकारी अधिकारियों के बीच मिली-भगत हो जाए तो फिर आधार कार्ड के जरिए इस भ्रष्टाचार को नहीं पकड़ा जा सकता है.

अभी तक सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं दिखती कि वो स्वास्थ, शिक्षा और जनवितरण प्रणाली में आधार कार्ड का इस्तेमाल करना चाहती है. इसके लिए सरकार को आधारभूत ढांचों को ठीक करना होगा जिसमे अरबों रूपए खर्च होंगे.

इसके अलावा भी कई दूसरी समस्याएं हैं.

लोगों से जो आंकड़े इकट्ठा किए जा रहें हैं उनकी प्रमाणिकता पर भी ऊंगलियां उठाई जा रही हैं. डाक विभाग का कहना है कि वो यूआईडी नंबर नहीं दे सकता क्योंकि नामांकन के दौरान लोगों के जो पते दर्ज किए गए थे वे ज्यादातर गलत हैं.

कमजोर सेवाएं

वैसे लोग जो बहुत ज्यादा हाथों से काम करते हैं, उनकी उंगलियों के निशान को सही तरीके से पढ़ना मुश्किल होता है. और आंखों की पुतलियों की जांच करने वाले स्कैनर फिंगरप्रिंट्स की जांच करने वाली मशीनों की तुलना में काफी मंहगे होते हैं इसका अर्थ ये हुआ कि बहुत सारी कंपिनयां इसका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी.

Image caption तकनीकी कमियां भी आधार योजना के लिए एक बड़ी चुनौती है.

यूआईडी प्राधिकरण के जरिए किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि पहचान की जांच करने का ये तरीका पूरी तरह सुरक्षित नहीं है.

इससे ये सवाल खड़ा होता है कि क्या इस परियोजना कि निगरानी ठीक तरह से नहीं हो रही है या फिर खर्च में कटौती के कारण कमजोर सेवाएं दी जा रही हैं.

लेकिन इन चुनौतियों से अलग एक दूसरी बड़ी समस्या है गरीबों के लिए बनाई गई योजनाओं से हटकर इसको सभी भारतीयों के लिए लागू करना जैसे कि आधार कार्ड के जरिए रेलवे की टिकट खरीदना.

आधार योजना भारत की सूचना तकनीक से जुड़े उद्योग को पूरी तरह बदल सकती है जैसा कि हाईवे सड़क विकास योजना ने निर्माण उद्योग को बदल दिया है.

आधार योजना का एक उद्देश्य सरकारी योजना का लाभ उठाने वाले गलत लोगों की पहचान करना तो है ही लेकिन इसका असल मकसद नरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों या वृद्ध आयु पेशन पाने वाले लोगों को योजना का फायदा जल्द से जल्द पहुंचाना है.

उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति घर खरीद रहा है और उसे शक है कि बेचन वाला असल में उस घर का मालिक है कि नहीं तो घर खरीदने वाला बैंक के जरिए आधार नंबर की मदद से इसकी जांच कर सकता है.

लेकिन फिर सरकार को इस बात का विश्वास दिलाना होगा कि किसी भी व्यक्ति से जुड़ी निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल नहीं होगा.

अगर सरकार लोगों के इस विश्वास को जीतने में सफल होती है तो आधार योजना से ना केवल गरीब सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे बल्कि आम आदमी को रोजमर्रा के कामों में भी इससे बहुत सविधा होगी.

सभी की नजर इस बात पर है कि क्या भारत का राजनीतिक नेतृत्व इस मौके का फायदा उठा सकेगा या इस मौके को गंवा देगा ?

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