कौन बनेगा राष्ट्रपति, रहस्य बरकरार

प्रणव मुखर्जी राष्ट्रपति पद की रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं. इमेज कॉपीरइट Reuters

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल अगले महीने पूरा हो जाएगा. उनकी जगह कौन लेगा, इसे लेकर अब तक तस्वीर साफ नहीं है.

केंद्र में सत्ताधारी यूपीए गठबंधन का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीद तय करने का अधिकार सौंप दिया है.

कई हफ्तों से राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जारी गहमागहमी में जो दो नाम उभर कर सामने आ रहे हैं, उनमें वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी सबसे आगे हैं.

इनमें से कौन यूपीए का उम्मीदवार होगा, इस पर रहस्य बरकरार है.

आमराय पर जोर

अगले हफ्ते राष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है, इसलिए जल्द ही उम्मीदवार की घोषणा होने की उम्मीद है.

यूपीए गठबंधन में शामिल कई पार्टियां प्रणव मुखर्जी के नाम को हरी झंडी दे चुकी हैं.

लेकिन फिर उम्मीदवार के नाम का एलान क्यों नहीं हो रहा है?

इस पर कांग्रेस नेता शकील अहमद ने बीबीसी को बताया, “कांग्रेस और यूपीए सरकार चाहते हैं कि इसमें कोई विवाद न हो. हम सभी लोगों से बात करके ऐसा उम्मीदवार दें जो राष्ट्रपति पद को सुशोभित करे और हमारे राष्ट्रपतियों ने जो परंपरा निभाई है उसे बरकार रखे.”

वैसे वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक इंदर मल्होत्रा मानते हैं कि सोनिया गांधी राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय करते समय भावी राजनीतिक परिदृष्य को जरूर ध्यान में रखेंगी.

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Image caption अगले महीने प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल पूरा हो रहा है.

वो कहते हैं, “मेरे ख्याल से कांग्रेस अध्यक्ष के लिए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर सबसे बड़ी कसौटी ये है कि वो तकलीफ तो नहीं देगा हमको. क्या मालूम 2014 के चुनाव में क्या हो जाए.”

'पहले यूपीए करे घोषणा'

सत्ताधारी यूपीए और विपक्षी एनडीए, दोनों के पास इतनी संख्या नहीं है कि वो अपने दम पर अपने उम्मीदवार को जिता सकें.

इसलिए उम्मीदवार तय करने से पहले एकराय कायम करने पर जोर दिया जा रहा है.

लेकिन यह विचार विमर्श अभी यूपीए के स्तर पर ही चल रहा है.

भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रकाश जावड़ेकर ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि सरकार ने उनसे अभी इस बारे में कोई बात नहीं की है. एनडीए, यूपीए की घोषणा के बाद ही अपने पत्ते खोलेगा.

प्रकाश जावड़ेकर कहते हैं, “राष्ट्रपति चुनाव का जहां तक प्रश्न है तो वो कोई आम चुनाव तो है नहीं. और इसीलिए जब तक सत्तारूढ़ दल प्रत्याशी घोषित नहीं करती, तब तक बाकियों की घोषणा का कोई तर्क नहीं है.”

प्रणव सबसे आगे

वैसे प्रणव मुखर्जी के नाम पर अब तक सिर्फ तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी ने आपत्ति जताई है, लेकिन अगर यूपीए की सभी पार्टियां मुखर्जी के नाम पर मुहर लगा दें तो ममता को भी अपने सहमति देनी पड़ सकती है.

ठीक वैसे ही जैसे पिछली बार शिवसेना को प्रतिभा पाटिल के मराठी होने पर उनका समर्थन करना पड़ा था.

इंदर मल्होत्रा कहते हैं, “अगर मुलायम सिंह प्रणव मुखर्जी के साथ हो जाएं तो प्रणव बाबू का राष्ट्रपति होना लाजिमी है.”

मल्होत्रा मानते हैं कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी यूपीए को बाहर से समर्थन देती हैं लेकिन वे सत्ताधारी गठबंधन के लिए अब तक तृणमूल कांग्रेस और डीएमके से कहीं ज्यादा वफादार साबित हुई हैं.

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