नेता के बिना चल रहा है देश: प्रेमजी

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Image caption अजीम प्रेमजी ने केंद्र की सरकार पर सीधा निशाना साधा है.

भारतीय उद्योग जगत की दो दिग्गज हस्तियों एनआर नारायण मूर्ति और अजीम प्रेमजी ने देश की आर्थिक बदहाली के लिए सरकार की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि इससे देश की छवि को धक्का पहुंचा है.

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की नामी कंपनी इंफोसिस के सह-संथापक नारायण मूर्ति का कहना है, “पिछले 3-4 महीनों के दौरान भारत की छवि को धक्का लगा है. एक भारतीय होने के नाते मैं इस बात को लेकर बहुत दुखी हूं कि हम इस हालत में आ पहुंचे हैं.”

वहीं अन्य सूचना प्रौद्योगिकी कपनी विप्रो के अध्यक्ष अजीम प्रेमजी ने राजनीतिक नेतृत्व की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है, “एक देश के तौर पर हम नेता के बिना चल रहे हैं. अगर हमने बदलाव नहीं किया तो हम वर्षों तक पिछड़े रहेंगे.”

इन दोनों औद्योगिक नेताओं ने ऐसे समय में ये बयान दिए हैं जब अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड्स एंड पूअर्स (एसएंडपी) ने हाल ही में चेतावनी दी कि आर्थिक सुधार नहीं किए गए तो भारत को अपनी निवेश संबंधी रेटिंग गंवानी पड़ सकती है.

'भारत ने ही पैदा की मुश्किलें'

सोमवार को प्रकाशित एक इंटरव्यू में मूर्ति ने कहा कि भारत अपनी पैदा की हुई चुनौतियों को भुगत रहा है. उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से हमने खुद ही ये सब चुनौतियां पैदा की हैं. बाहर से कुछ नहीं आया है. अच्छी बात ये है कि हम इन्हें सुधार भी सकते हैं. हमने बहुत नुकसान कर लिया है लेकिन इससे भी ज्यादा नुकसान हो सकता है.”

मूर्ति ने कहा कि भारत को अपने बुनियादी ढांचे को बेहतर करने और 8 से 9 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि हासिल करने के लिए विदेशी निवेशकों की जरूरत है.

जब मूर्ति से पूछा गया कि स्थिति को कैसे सुधारा जा सकता है तो उन्होंने कहा, “अगर आप अगले दो साल में 7-8 सुधार कर देते हैं तो मेरे ख्याल से हालात बदल सकते हैं.”

प्रेमजी का बयान भी सोमवार को एक कांफ्रेस के दौरान दिया. उसी दिन भारत को एसएंडपी की चेतावनी मिली थी.

कांग्रेस का पलटवार

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Image caption आर्थिक मुश्किलों के बीच सरकार चौतरफा आलोचना झेल रही है.

सरकार ने एसएंडपी की चेतावनी को खारिज कर दिया है. कांग्रेस सांसद मणिशंकर अय्यर का कहना है कि 'प्रेमजी और अन्य लोग हितों वाले वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि सरकार राष्ट्रीय हित का प्रतिनिधित्व करती है.'

उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं जो पहले इसी नेतृत्व की तारीफें करते थे और अब चूंकि उन्हें परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं तो वे इतनी 'हायतौबा मचा रहे हैं'.

विश्लेषकों से बातचीत में प्रेमजी ने कहा कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अस्थिरता के दौर से गुजर रही हैं. साथ ही ग्रीस भी अधर में लटका और भारत के सामने उसकी अपनी ही समस्याएं खड़ी हैं.

एक अन्य उच्च उद्योगपति दीपक पारेख ने भी कहा कि राजनीतिक 'इच्छाशक्ति की कमी' के कारण भारत पिछड़ रहा है और निवेशकों को 'दीर्घकालीन-बुनियादों' का हवाला देकर अब और नहीं मनाया जा सकता.

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