अल्पसंख्यक आरक्षण: हाईकोर्ट के फैसले पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Image caption सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यकों के लिए अलग से 4.5 प्रतिशत आरक्षण को संविधान और कानून के हिसाब से सही नहीं बताया है

सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़े वर्गों के 27 प्रतिशत आरक्षण में से धार्मिक अल्पसंख्यकों को 4.5 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था को खारिज करने वाले आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से केंद्र सरकार को झटका लगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 27 प्रतिशत आरक्षण में से ही अल्पसंख्यकों के लिए इस वर्ष जनवरी से 4.5 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का सरकार का फैसला प्रथम दृष्टया संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नजर नहीं आता है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग की तरह, अल्पसंख्यकों के लिए अलग से 4.5 प्रतिशत आरक्षण किसी कानून के हिसाब से भी नहीं मुनासिब नहीं लगता है.

ओबीसी के लिए ज्यादा सीटें

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अन्य पिछड़ा वर्गों के छात्रों को आईआईटी में अब पहले से ज्यादा सीटें मिलेंगी, जिन्हें 4.5 प्रतिशत आरक्षण की बुनियाद पर अल्पसंख्यकों के लिए अलग रख दिया गया था.

आईआईटी संस्थानों में प्रवेश के लिए काउंसलिंग का बुधवार को आखिरी दिन है.

केंद्र सरकार ने 4.5 प्रतिशत आरक्षण के लिए रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला दिया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे तर्कसंगत नहीं माना और कहा कि इस तरह आरक्षण दिया जाना संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन है.

4.5 प्रतिशत आरक्षण के लाभ के दायरे में आने वाले छात्रों ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि उन्हें इस मामले में प्रतिवादी बनाया जाए और फैसले पर रोक लगाई जाए.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन छात्रों को इस मामले में प्रतिवादी बनने की इजाजत दी जा रही है लेकिन हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई जाएगी.

इस फैसले का परिणाम ये होगा कि अल्पसंख्यक छात्रों को अब 27 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से ही दाखिला मिलेगा.

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