गरीबी नहीं बन सकी रूकावट दिव्या के लिए

  • 16 जून 2012
दिव्या (फाइल फोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption गरीबी और दूसरी परेशानियां दिव्या के रास्ते में रूकावट नहीं बन सकीं

प्रतिभा आगे बढ़ने के लिए किसी की मोहताज नहीं होती, इस बात को साबित कर दिखाया है चेन्नई की एक बेघर लड़की दिव्या ने.

दिव्या ने दसवीं की परीक्षा में अपने स्कूल में सबसे ज्यादा अंक हासिल करके सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. चेन्नई हाई स्कूल से पढ़ाई करने वाली दिव्या ने 500 में 427 अंक हासिल किए हैं.

दिव्या की कामयाबी की ख़बर 'द हिंदू' अख़बार में छपने के बाद इंडियन बैंक ने दिव्या की वित्तीय मदद करने का फैसला किया है.

दिव्या की प्रतिभा को पहचानते हुए बैंक ने दिव्या की पूरी पढ़ाई-लिखाई का ख़र्चा उठाने का भी फैसला किया है.

इंडियन बैंक के महाप्रबंधक टीएम भसीन ने दिव्या के नाम से एक बचत खाता खुलवा दिया है और दिव्या को बैंक की तरफ़ से एक एटीएम कार्ड भी दिया गया है.

दिव्या की मदद के लिए बैंक के कदमों के बारे में बताते हुए इंडियन बैंक के महाप्रबंधक टीएम भसीन कहते हैं, ''द हिंदू अखबार में छपी खबर ने मुझे बड़ा प्रभावित किया. मैं उसे गोद लेना चाहता था. लेकिन मेरे सहयोगियों का विचार था कि बेहतर ये होगा कि बैंक दिव्या को गोद ले. तो अब दिव्या इंडियन बैंक की बिटिया हो गई है.''

फुटपाथ पर ज़िंदगी

इंडियन बैंक अब दिव्या की स्नातक तक की पढ़ाई का पूरा ख़र्चा देगी. बैंक ने दिव्या के रहने का भी इंतजाम किया है. बैंक ने दिव्या के भाई-बहनों की पढ़ाई के लिए भी मदद करने का वादा किया है.

सोलह साल की दिव्या अपने छोटे भाई-बहनों और दादी के साथ चेन्नई के फुटपाथ पर बीते आठ साल से रह रही है.

तमाम मुश्किलों से जूझते हुए भी दिव्या ने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई-लिखाई पर केंद्रित किया. ये पढ़ाई भी उसने स्ट्रीट लाइट्स के सहारे की.

बीबीसी संवाददाता हरिप्रिया माधवन से एक ख़ास बातचीत में दिव्या ने कहा, ''मैं बाजार के इलाके में रहती हूं. आप चारों तरफ गाड़ियों की आवाज़ सुन सकती हैं. रात में शराब पीकर कई लोग हमें तंग करते हैं और कई बार तो मेरी दादी से लड़ाई झगड़ा करते हैं. कई बार मुझे पुलिस स्टेशन तक जाना पड़ता है उनकी शिकायत करने के लिए.''

भगवान में यक़ीन और आत्म-विश्वास को अपनी सफलता का राज़ बताते हुए दिव्या ने कहा कि उसने नौवीं क्लास में पढ़ाई छोड़ दी थी लेकिन उनके स्कूल टीचर रेवती ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए जोर दिया और दोबारा दसवीं कक्षा में उनका दाखिला करा दिया.

दिव्या ने कहा कि उनके अपने ही रिश्तेदार उसक मज़ाक उड़ाया करते थे और शायद इसी कारण दिव्या ने दृढ़ निश्चय कर लिया था कि वे पढ़ाई के जरिए आगे बढ़ेगीं.

दिव्या आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहती हैं ताकि वो दूसरों की सेवा कर सकें, लेकिन उससे पहले वो 12 वी क्लास में पूरे राज्य में अव्वल आना चाहती हैं.

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