कलाम ने राष्ट्रपति की उम्मीदवारी से मना किया

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Image caption कलाम ने इस बारे में अब तक मौन साध रखा था.

करीब एक पखवाड़े की चुप्पी के बाद पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है.

सोमवार की भारतीय जनता पार्टी नेता लालकृष्ण आडवाणी से फोन पर बात करने और आडवाणी के दूत सुधिन्द्र कुलकर्णी से दो बार मुलाकात करने के बाद कलाम ने आखिरकार चुनाव लड़ने से साफ इंकार कर दिया.

दिल्ली में जारी एक बयान में कलाम ने कहा "ममता बनर्जी और कई अन्य राजनीतिक दलों ने यह इच्छा जाहिर की कि मैं दूसरी बार इस पद के लिए चुनाव लडूं. मैं उन सबका ह्रदय से आभारी हूं लेकिन बहुत विचार के बाद मैं कह सकता हूं कि मेरी अंतरात्मा वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव लड़ने को नहीं कहती."

भारतीय जनता पार्टी और ममता बनर्जी के अलावा शिव सेना भी कलाम के पक्ष में थीं.

मजबूरी

कलाम के इस फैसले से विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की परेशानी बढ़ गई है क्योंकि अब अगर वह प्रणब का समर्थन करती हैं तो माना जाएगा कि उसने ऐसा मजबूरी में किया.

दूसरी तरफ मुखर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ाने के लिए किसी कद्दावर प्रत्याशी को खोजना कोई आसान बात नहीं है, खास तौर पर तब जब उस प्रत्याशी का हारना लगभग तय दिखाई पड़ रहा हो.

राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर अकेली दिखाई दे रहीं ममता बनर्जी ने रविवार की रात तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को फोन कर एपीजे अब्दुल कलाम की उम्मीदवारी पर समर्थन मांगा लेकिन जयललिता ने उलटे पीए संगमा के लिए समर्थन की मांग कर दी.

इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने भी कलाम के नाम का समर्थन किया था.

वर्तमान हालात में प्रणब मुखर्जी और पीए संगमा, केवल दो ही लोग इस दौड़ में अभी तक दिख रहे हैं.

संगमा को गंभीर नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके पास अभी तक मह बीजू जनता दल और एआईएडीएमके का ही समर्थन है और खुद उनकी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी उन्हें दौड़ से बाहर होने को कह रही है.

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