पुलिसवाले चरमपंथी घटनाओं में गिरफ्तार

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Image caption इन लोगों से केंद्रीय रिज़र्व सुरक्षा बल के कैम्प के ऊपर हुए हमले के बारे में भी पूछताछ की जा रही है.

भारत प्रशासित राज्य जम्मू और कश्मीर की पुलिस ने अपने ही तीन पुलिसवालों को चरमपंथी घटनाओं में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है.

पुलिस ने अभी तक बस यही कहा है की "इन लोगों ने अपनी सीमा से बाहर जाकर काम किया."

पुलिस विभाग के अधिकारीयों में सुगबुगाहट है कि कुछ और आला अफसर भी इस तरह की घटनाओं में शामिल हो सकते हैं. विभाग के अधिकारियों और गिरफ्तारियों की संभावनाओं से भी इनकार नहीं कर रहे.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आफताब उल मुजतबा ने इस बारे में कहा "हम अपने ही कुछ लोगों की हिंसक घटनाओं में शामिल होने के आरोपों की जांच कर रहे हैं. " उन्होंने दावा किया कि ऐसे अब तक उन्हें कोई सबूत हाथ नहीं लगे हैं जिनसे यह कहा जा सके कि यह गिरफ़्तार लोग कुछ बड़े अधिकारियों के कहने पर काम कर रहे थे.

मुजतबा के अनुसार "हम लम्बे समय से अपने लोगों को चरमपंथी संगठनों में घुसाते रहे हैं ताकि हमें उनसे सामरिक जानकारी हासिल हो सके. लेकिन जहाँ तक इस घटना का प्रश्न है यहाँ इन पुलिसवालों ने बिना किसी आदेश के ऐसा किया." यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है कि स्थानीय सरकार यह दावा कर रही है कि करीब 22 सालों से चली आ रही चरमपंथ की समस्या समाप्त हो गई है.

पुनर्स्थापन

राज्य सरकार पकिस्तान से आये क़रीब ऐसे 500 ऐसे हथियारबंद लड़ाकों को पुनर्स्थापित करने में लगी है जो अपने घरों में वापस लौट आये हैं.

अनुमानों के अनुसार क़रीब 2000 ऐसे और लोग भारत प्रशासित कश्मीर में वापस आने के लिए आतुर हैं. पिछले कई महीनों से इस राज्य में होने वाली हिंसक घटनाओं पर सवालिया निशान लग रहे हैं.

मुख्यमंत्री ऊमर अब्दुल्लाह को अपनी पार्टी के प्रवक्ता मुस्तफा कमाल को उनके भारतीय सेना के बारे में एक विवादास्पद बयान के बाद हटाना पड़ा था.

कमाल ने कहा दिया था कि बम धमाकों, गोलीबारी और कई अन्य हिंसक घटनाओं के पीछे भारतीय सेना की सोच काम कर रही है ताकि सेना को बचाने वाले अत्याधिक कड़े आफस्पा जैसे कानूनों को बनाए रखा जा सके.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह लंबे समय से सेना के बचाव के लिए लागू किए गए विशेष कानून को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं.

जो लोग गिरफ़्तार चरमपंथियों से की जा रही पूछताछ से वाकिफ हैं उनका कहना है कि इन लोगों से केंद्रीय रिज़र्व सुरक्षा बल के कैम्प के ऊपर हुए हमले के बारे में भी पूछताछ की जा रही है.

इस हमले में सीआरपीएफ़ के सात जवान घायल हो गए थे.

चरमपंथ के आरम्भ के दिनों में एक बार राज्य के पुलिस बालों ने भारतीय सेना के खिलाफ़ "बगावत" कर दी थी. इस घटना के बाद भारतीय सेना ने पुलिस कंट्रोलरूम पर कब्ज़ा कर लिया था और बड़ी मुश्किल से पुलिस वालों को समझाया गया था.

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