सिंगूर मामले में ममता को झटका, टाटा को राहत

टाटा
Image caption टाटा ने हाई कोर्ट के एक सदस्यीय बेंच के फैसले को चुनौती दी थी

पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित सिंगूर जमीन मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने सिंगूर भूमि पुनर्वास और विकास अधिनियम को असंवैधानिक करार दिया है.

जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष और जस्टिस मृणल कांति चौधरी की खंडपीठ ने इस अधिनियम को खारिज करते हुए कहा कि इसमें राष्ट्रपति की सहमति नहीं ली गई थी.

कलकत्ता हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ ममता सरकार दो महीने के अंदर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है.

टाटा ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के ही एक सदस्यीय बेंच के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसने पिछले साल इस अधिनियम को सही ठहराया था.

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद पिछले साल जून में ये अधिनियम पारित किया था.

इस विधेयक के तहत सिंगूर में टाटा के साथ हुए समझौते को रद्द करते हुए ज़मीन किसानों को वापस दी जानी थी.

विवाद

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Image caption ममता बनर्जी के लिए ये बड़ा झटका है

पश्चिम बंगाल में पिछली वाममोर्चे सरकार के कार्यकाल में टाटा समूह के साथ समझौता हुआ था जिसके तहत टाटा को सिंगूर में अपना संयंत्र लगाना था और उसके लिए उसे भूमि आबंटित की गई थी.

पश्चिम बंगाल सरकार ने एक हज़ार एकड़ जमीन का अधिग्रहण करके उसे टाटा मोर्टस को सौंप था जहाँ वो टाटा नैनो बनाने वाली थी. सिंगूर में टाटा मोटर्स का काम जनवरी 2007 में शुरु हुआ था

लेकिन भूमि आबंटन को लेकर टाटा समूह को लोगों का ज़बरदस्त विरोध झेलना पड़ा था.

योजना का विरोध करने वालों का कहना था कि सिंगूर में चावल की बहुत अच्छी खेती होती है और वहाँ के किसानों को इस परियोजना की वजह से विस्थापित होना पड़ा है.इसे लेकर हिंसक प्रदर्शन भी हुए थे.

आख़िरकर 2008 में टाटा समूह ने सिंगूर स्थित अपने संयंत्र को पश्चिम बंगाल से हटाने का फ़ैसला किया था.

ममता बनर्जी ने 2011 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सिंगूर को एक बड़ा मुद्दा बनाया था.

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