भारत: आत्महत्या युवाओं की मौत का दूसरा बड़ा कारण

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Image caption अध्ययन में भारत में मनोचिकित्सा का अभाव भी आत्महत्या की वजह माना गया है

एक अध्ययन के अनुसार भारत में युवाओं की मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या है.

भारत उन देशों में शामिल है जहाँ आत्महत्या सर्वाधिक होती हैं.

ये अध्ययन लंदन से प्रकाशित होने वाली पत्रिका लांसेट में प्रकाशित हुआ है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2010 में भारत में एक लाख 90 हज़ार लोगों ने आत्महत्याएं की थीं.

जबकि वैश्विक स्तर पर हर वर्ष लगभग नौ लाख लोग आत्महत्याएँ करते हैं.

आत्महत्या करने वालों की सबसे बड़ी संख्या चीन की हैं जहाँ औसतन दो लाख लोग हर वर्ष आत्महत्या कर लेते हैं.

सड़क दुर्घटनाओं से भी अधिक

लंदन स्कूल ऑफ हाईजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के विक्रम पटेल प्रमुख शोधकर्ताओं में से एक हैं.

वे कहते हैं, “भारत में 15 से 29 वर्ष के युवकों में आत्महत्या की वजह से होने वाली मौतें लगभग इतनी होती हैं जितनी कि सड़क दुर्घटनाओं से. वहीं इसी आयु वर्ग में युवतियों में आत्महत्या से होने वाली मौतें गर्भावस्था के दौरान की गड़बड़ी और बच्चों के जन्म के दौरान होने वाली मौतों जितनी होती हैं.”

अध्ययन के मुताबिक भारत में युवाओं की मौत की सबसे बड़ी वजह सड़क दुर्घटनाएं हैं (14 प्रतिशत) जबकि युवतियों की मौत की सबसे बड़ी वजह मातृत्व संबंधी बीमारियाँ (16 प्रतिशत) हैं.

इनके बाद भारत में युवाओं की मौत की सबसे बड़ी वजह आत्महत्या है. युवकों में ये 13 प्रतिशत मौतें आत्महत्या की वजह से होती हैं जबकि 16 प्रतिशत युवतियों की मौत की वजह आत्महत्या होती है.

अध्ययन में ये भी कहा है कि सरकारी प्रयासों से मातृत्व मृत्यु दर में गिरावट आ रही है. इसलिए वो दिन दूर नहीं जब भारत में युवतियों की मौत की सबसे बड़ी वजह आत्महत्या होगी.

एचआईवी एड्स को दुनिया भर में जानलेवा बीमारी माना जाता है लेकिन आंकड़ों का हवाला देते हुए विक्रम पटेल कहते हैं, “भारत में आत्महत्या से होने वाली मौतें एचआईवी/एड्स से होने वाली मौतों की तुलना में दोगुनी हैं.”

आत्महत्या करने वालों में बड़ी संख्या में युवक-युवतियाँ कीटनाशक का प्रयोग करते हैं. विक्रम पटेल के मुताबिक कीटनाशकों की उपलब्धता को प्रतिबंधित करने से भारत में आत्महत्या की दर को कम किया जा सकता है.

बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में विक्रम पटेल ने बताया कि युवाओं में आत्महत्या की ये प्रवृत्ति उत्तर भारत की बजाय दक्षिण भारत में कहीं ज्यादा है.

राष्ट्रीय सर्वेक्षण

लांसेट की ये रिपोर्ट साल 2001-03 में आत्महत्या के कारणों पर कराए गए रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के पहले राष्ट्रीय सर्वेक्षण पर आधारित है.

रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की सर्वेक्षण के मुताबिक वर्ष 2001-03 के बीच पंद्रह साल के आस-पास की उम्र के लगभग तीन फीसदी लोगों की मौत का कारण आत्महत्या ही थी.

कुल मौत संबंधी आँकड़ों के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रेक्षणों का इस्तेमाल करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2010 में करीब एक लाख 87 हजार लोगों ने आत्महत्या के जरिए मौत को गले लगाया.

इस दौरान आत्महत्या करने वाले करीब चालीस प्रतिशत युवक 15 से 29 वर्ष के बीच की उम्र के थे.

जबकि इसी उम्र की युवतियों का प्रतिशत 56 था.

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