मनमोहन को उम्मीद, मान जाएंगी ममता

  • 24 जून 2012
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Image caption प्रधानमंत्री ने आर्थिक चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि तृणमूल कांग्रेस राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन करेगी. उन्होंने जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल का भी संकेत दिया है.

ब्राजील के रियो डि जेनेरियो शहर में सतत विकास पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौटते हुए मनमोहन सिंह ने अपने विशेष विमान पर पत्रकारों से बातचीत में कहा, “तृणमूल कांग्रेस अब भी यूपीए का हिस्सा है और मैंने अभी ये उम्मीद नहीं छोड़ी है कि तृणमूल काग्रेस (मुखर्जी की) उम्मीदवारी का समर्थन करेगी.”

तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को उम्मीदवार बनाए जाने का विरोध करती रही हैं.

वे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को फिर से उम्मीदवार बनाने के पक्ष में थीं, लेकिन कलाम ने खुद को इस रेस से अलग कर लिया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने आम राय से मुखर्जी को राष्ट्रपति बनाने के मुद्दे पर विपक्ष से बात की थी. मनमोहन सिंह के मुताबिक यूपीए में राष्ट्रपति पद के लिए मुखर्जी का नाम तय होने के बाद उन्होंने बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली से समर्थन के लिए बात की.

7 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद

जब उनसे मंत्रिमंडल में फेरबदल के बारे में पूछा गया तो प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं सोचता हूं कि ये बहुत ही वैध आकांक्षा है.. आपको इस बारे में बताया जाएगा.”

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Image caption राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला प्रणब मुखर्जी और पीए संगमा के बीच है.

इसका मतलब है कि देश को जल्द नया वित्त मंत्री मिल सकता है.

प्रणब मुखर्जी के हटने के बाद वित्त मंत्री के पद के दावेदारों में गृह मंत्री पी चिंदबरम, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख सी रंगराजन और ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के नाम लिए जा रहे हैं.

भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को दूर करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मुद्रास्फीति से पैदा होने वाली मंदी का कोई सवाल ही नहीं है और बाकी बचे मौजूदा वित्तीय वर्ष में वृद्धि दर बढ़ कर 7 प्रतिशत हो जाएगी.

वैसे पिछले साल वार्षिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही जबकि 2011-2012 की आखिरी तिमाही में ये 5.3 प्रतिशत हो गई.

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