सरबजीत विवाद ब्रेकिंग न्यूज के कारण: बाबर

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption सवाल है कि कैसे चंद घंटो में में सरबजीत सिंह की रिहाई , सुरजीत सिंह की रिहाई में बदल गई.

पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि मौत की सज़ा का सामना कर रहे भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह एक बार फिर ‘मिस्टेकन आइडेन्टिटी’ यानी ग़लत पहचान और संबंधित घटनाक्रम का शिकार हुए हैं.

बुधवार को मीडिया में यही चर्चा रही कि कैसे चंद घंटो में सरबजीत सिंह की सजा घटाए जाने और संभावित रिहाई, सुरजीत सिंह की रिहाई में बदल गई.

राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के प्रवक्ता फरहातुल्लाह बाबर ने बीबीसी संवाददाता मोहन लाल शर्मा से विशेष बातचीत में उपापोह की स्थिति को साफ करते हुए दावा किया कि मीडिया ने ब्रेकिंग न्यूज की हड़बड़ी के चलते सरबजीत सिंह का नाम चला दिया.

उन्होंने कहा,”मैने भारतीय टीवी चैनल से बातचीत में सुरजीत का नाम लिया था न कि सरबजीत का. लेकिन क्योंकि उनके दिमाग में बस सरबजीत का ही नाम था इसलिए जल्दबाजी में उन्होंने सरबजीत सिंह की ही खबर बना दी.”

ये पूछे जाने पर क्या इस खबर ने मीडिया को शर्मिंदा किया है फरहातुल्लाह बाबर ने कहा कि निश्चित रुप से और इसमें कोई संदेह की बात ही नही.

जब फरहातुल्लाह बाबर से उन खबरों पर टिप्पणी मांगी गई जिनमें कहा गया था कि संभवत: चरमपंथियों के दबाव में सरबजीत सिंह के नाम की जगह सुरजीत सिंह का नाम बदला गया, तो उनका कहना था, “इसकी प्रमाणिकता तो किसी भी वक्त सिद्ध की जा सकती है कि जो पत्र कानून मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को मंगलवार को भेजा था उसमें किसका नाम है - सुरजीत सिंह का या फिर सरबजीत का. अगर उसमें सुरजीत सिंह का नाम है तो दबाव में नाम बदलने वाली बात तो अपने आप ही खारिज हो जाती है.”

पढ़े सरबजीत सिंह की कहानी

फरहातुल्लाह बाबर से बीबीसी की बातचीत सुनें

घटनाचक्र

मीडिया ने मंगलवार को ख़बर दी थी कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने लाहौर की जेल में कैद भारतीय नागरिक सबरजीत की मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया और उनकी रिहाई के आदेश दिए.

उसके बाद राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता फरहातुल्लाह बाबर ने इसकी पुष्टि की और कानून मंत्रालय की सचिव यासमीन अब्बासी ने बताया कि कानून मंत्रालय ने सरबजीत सिंह की रिहाई के लिए गृह मंत्रालय को सिफारिश की है.

इस खबर से भारत में खुशी की लहर दौड़ गई और भारतीय सरकार ने हुकुमत-ए-पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया. साथ ही पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की प्रशंसा भी की.

लेकिन कुछ घंटों बाद रात करीब 12 बजे राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता फरहतुल्लाह बाबर ने पत्रकारों को एसएमएस संदेश भेजे कि उनकी सरकार ने सरबजीत सिंह को नहीं बल्कि एक ओर भारतीय नागरिक सुरजीत सिंह को रिहा करने का फैसला लिया है.

भारत में निराशा

सरबजीत की रिहाई की गलत खबर से जहां भारत में निराशा छाई गई, वहीं पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरबजीत सिंह के वकील ने कहा कि इससे पाकिस्तान की छवि काफी खराब हुई है.

सरबजीत सिंह के वकील अवैस शैख ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “कोई सोच भी नहीं सकता कि ऐसा होगा क्योंकि सरबजीत और सुरजीत दोनों का मामला अलग है. राष्ट्रपति जरदारी तो केवल सरबजीत सिंह की सजा को माफ कर सकते हैं जबकि सुरजीत सिंह तो उम्र कैद का कैदी है.”

उन्होंने बताया कि गलत खबर फैलाने से पाकिस्तान की छवि काफी खराब हो गई है और राष्ट्रपति जरदारी के प्रवक्ता फरहातुल्लाह बाबर को इस्तीफा देना चाहिए.

उनके अनुसार पाकिस्तान ने सरबजीत सिंह के मामले में दुनिया अच्छा संदेश नहीं भेजा है और इसको लेकर सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है कि वह इस मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही है.

गलत पहचान का शिकार

वरिष्ठ पत्रकार शौकत पराचा ने बीबीसी पत्रकार हफीज चाचड़ से बातचीत में कहा कि सरबजीत सिंह को एक बार फिर गलत पहचान की वजह से निराशा हुई है और सरकार को इस तरह के मामलों में गंभीरता से काम लेना चाहिए.

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मामाल सुरजीत सिंह का था को राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी के प्रवक्ता को मीडिया के सामने आने की जरुरत क्यों पेश आई है क्योंकि सुरजीत का मामला राष्ट्रपति के पास नहीं है.

पराचा के मुताबिक हो सकता है कि पहले मामला सरबजीत सिंह का ही हो और बाद में घरेलू दबाव के कारण फैसला बदल दिया गया हो.

फैसले की आलोचना

गौरतलब है कि जब सरबजीत सिंह की रिहाई की खबरें सामने आईं तो मीडिया में सरकार के उस फैसले की कड़ी आलोचना की गई और विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज ने भी उसको आड़े हाथों लिया.

लाहौर से मिल रही खबरों के मुताबिक़ बम धमाकों में मारे गए लोगों के परिजनों ने सरकार पर दबाव डाला कि अगर सरबजीत सिंह को रिहा किया गया तो वह आत्महत्या करेंगे.

दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता अंसार बर्नी ने भी इस खबर पर निराशा जताई और कहा कि इस पता चलता है कि सरकार इन मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही हैं.

उन्होंने सुरजीत सिंह की रिहाई का स्वागत किया और यह भी कहा कि सरकार तुरंत सरबजीत सिंह को भी रिहा कर दे.

संबंधित समाचार